करोड़ों की लागत और पहली बारिश भी न झेल सका पुल: कांगड़ा में भ्रष्टाचार या कुदरत का कहर? जांच के आदेश

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में विकास के दावों की पोल खुल गई है। शाहपुर क्षेत्र में चंबी खड्ड पर बन रहा करोड़ों का निर्माणाधीन पुल मंगलवार को ताश के पत्तों की तरह ढह गया। धनोटू-ललेटा-बनुमहादेव मार्ग पर स्थित यह पुल अपने निर्माण के अंतिम चरण में था। इस हादसे ने निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। गनीमत यह रही कि हादसा रात के समय हुआ, जिससे किसी जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।

खड्ड में समाया ढाई करोड़ का प्रोजेक्ट, 90 प्रतिशत काम था पूरा

शाहपुर की इस महत्वपूर्ण सड़क पर करीब 2.50 करोड़ रुपये की लागत से 50 मीटर लंबे सिंगल लेन पुल का निर्माण हो रहा था। महज आठ महीने पहले शुरू हुए इस कार्य का 90 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका था। चंबी खड्ड में अचानक जलस्तर बढ़ने से शटरिंग धंस गई और पूरी स्लैब मलबे में तब्दील होकर पानी में समा गई। स्थानीय लोग अब पुल के डिजाइन, तकनीकी पक्ष और लोक निर्माण विभाग की विभागीय निगरानी पर कड़े सवाल उठा रहे हैं।

अधिकारियों का तर्क: कुदरत का कहर, ठेकेदार का नुकसान

लोक निर्माण विभाग शाहपुर मंडल के अधिशासी अभियंता नीरज जसवाल ने तकनीकी लापरवाही से इनकार किया है। उनका कहना है कि भारी वर्षा और खड्ड का जलस्तर बढ़ने से यह हादसा हुआ। ठेकेदार ने दावा किया है कि इस घटना से उसे लगभग 1.50 करोड़ रुपये का निजी नुकसान हुआ है। विभाग का कहना है कि निर्माण सामग्री के टेस्ट मानकों पर सही पाए गए थे। अब ठेकेदार को अपने खर्च पर ही इस पुल का दोबारा निर्माण करना होगा।

विधायक के सख्त तेवर: उच्चस्तरीय जांच और कानूनी कार्रवाई के निर्देश

शाहपुर के विधायक एवं उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने घटना का कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रशासनिक और लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ मौके का मुआयना किया और उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए। विधायक ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जांच में भ्रष्टाचार या कोताही की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। मौके पर एसडीएम शाहपुर गणेश ठाकुर सहित वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी मौजूद रहे।

लापरवाही की भेंट चढ़ा जनता का सपना

इस पुल के निर्माण से धनोटू क्षेत्र की बड़ी आबादी को बारहमासी सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन तकनीकी खामियों या भारी बारिश की भेंट चढ़े इस पुल ने प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विभाग के कनिष्ठ अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता तक सभी की जिम्मेदारी तय की जा रही है। अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह साफ करेगी कि यह महज एक प्राकृतिक हादसा था या भ्रष्टाचार का परिणाम।

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