Delhi Excise Policy Case: अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ीं? दिल्ली हाईकोर्ट ने बनाई नई बेंच, अब इस दिन होगी अहम सुनवाई

Delhi News: दिल्ली शराब नीति घोटाले से जुड़े सीबीआई मामले में एक बड़ा उलटफेर सामने आया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों को बरी करने के खिलाफ दायर सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए अब एक नई विशेष बेंच का गठन कर दिया है।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को अलग किया

अदालत ने यह बड़ा फैसला तब लिया जब पुरानी बेंच की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को इस संवेदनशील मामले की सुनवाई से पूरी तरह अलग कर लिया। अब सीबीआई की इस मुख्य याचिका पर आगे की सुनवाई जस्टिस मनोज जैन की नई बेंच करेगी।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 14 मई को एक विस्तृत आदेश जारी किया था। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने केस से हटने से मना किया था, तब सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया गया। कुछ लोगों ने उनके खिलाफ वीडियो और कई आपत्तिजनक सार्वजनिक बयान जारी किए थे।

जस्टिस शर्मा के मुताबिक यह हरकतें कानून के प्रति निष्पक्ष आलोचना और आपराधिक अवमानना के बीच की सीमा को पार कर गईं। अवमानना करने वालों ने न केवल व्यक्तिगत असहमति जताई, बल्कि इस जज और पूरी न्यायपालिका के खिलाफ एक बड़ा बदनामी का अभियान भी चलाया।

आप नेताओं के अवमानना केस के लिए नई खंडपीठ

इस पूरे विवाद से जुड़े एक अन्य मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और सौरभ भारद्वाज सहित कई ‘आप’ नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मुकदमा चल रहा है। हाईकोर्ट ने इसकी सुनवाई के लिए भी अब एक अलग विशेष खंडपीठ का गठन किया है।

नेताओं के इस अवमानना मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी सुनवाई जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ करेगी। दिल्ली हाईकोर्ट में इन दोनों बेहद महत्वपूर्ण और बड़े मामलों पर मंगलवार को सुनवाई होगी, जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

गौरतलब है कि आबकारी नीति मामले में निचली अदालत ने 1,100 से अधिक पैराग्राफ वाले अपने ऐतिहासिक फैसले में केजरीवाल और सिसोदिया सहित सभी आरोपियों को पूरी तरह बरी कर दिया था। निचली अदालत ने कहा था कि इस मामले में अभियोजन पक्ष कोई बड़ी साजिश साबित नहीं कर पाया है।

निचली अदालत ने अपने फैसले में यह भी साफ किया था कि अब रद्द हो चुकी आबकारी नीति पूरी तरह एक गहरी सलाह-मशविरे और सोच-विचार वाली प्रक्रिया का परिणाम थी। हालांकि, सीबीआई ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर दोबारा जांच की मांग की है।

सीबीआई ने अपनी इस नई पुनर्विचार याचिका में आम आदमी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि तत्कालीन दिल्ली सरकार ने कुछ चुनिंदा शराब व्यापारियों को अवैध फायदा पहुंचाने के लिए नीति में हेर-फेर किया था और रिश्वत ली थी।

Author: Harikarishan Sharma

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