केरल में मंत्रियों की गाड़ियों पर क्यों लिखे होते हैं बेहद छोटे नंबर, जानें नंबर 13 के पीछे का हैरान करने वाला पूरा सच?

Thiruvananthapuram News: केरल में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न हो चुका है। इसके बाद जब मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और उनके कैबिनेट मंत्रियों का काफिला सड़क पर निकला, तो सबकी नजरें उनकी गाड़ियों पर ठहर गईं। इन वीआईपी गाड़ियों की नंबर प्लेट पर सिर्फ एक या दो अंक ही लिखे हुए थे।

गाड़ियों के खास नंबर दिखाते हैं मंत्रियों की वरिष्ठता

केरल में सरकारी वाहनों को खास नंबर देने की यह पुरानी परंपरा बेहद दिलचस्प है। दरअसल मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों के काफिले में शामिल वाहनों के नंबर कैबिनेट में उनके बैठने के क्रम को दर्शाते हैं। ये नंबर सीधे तौर पर मंत्रियों की आधिकारिक वरिष्ठता और उनके ऊंचे पद को तय करते हैं।

केरल मोटर वाहन विभाग आवंटित करता है ये नंबर

राज्य का मोटर वाहन विभाग इन खास नंबरों को मंत्रियों की रैंकिंग के हिसाब से जारी करता है। उदाहरण के लिए मुख्यमंत्री की आधिकारिक गाड़ी का नंबर हमेशा 1 होता है। इसके बाद कैबिनेट में दूसरे सबसे वरिष्ठ मंत्री को नंबर 2 और तीसरे वरिष्ठ मंत्री को नंबर 3 की गाड़ी मिलती है।

अशुभ मानकर नंबर 13 से सबने बनाई दूरी

केरल के इस सरकारी बेड़े में नंबर 13 को लेकर एक बेहद अजीब किस्सा जुड़ा है। साल 2006 में अच्युतानंदन कैबिनेट का कोई भी मंत्री इस नंबर की गाड़ी लेने को राजी नहीं था। हालांकि बाद में तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने इस अंधविश्वास को दूर करने के लिए खुद आगे आकर यह गाड़ी ली थी।

सरकारी बेड़े से हमेशा के लिए हटाया गया नंबर 13

लेफ्ट विचारधारा के नेता खुद को पूरी तरह नास्तिक कहते हैं। वे किसी भी तरह के शुभ-अशुभ या अंधविश्वास को सिरे से खारिज करते हैं। इसके बावजूद उनकी सरकार में भी मंत्री इस खास नंबर से हमेशा बचते रहे। इसी वजह से बाद में सरकारी बेड़े से नंबर 13 को हटा दिया गया।

आम जनता भी पा सकती है एक अंक वाला नंबर

क्या आम लोग भी अपनी गाड़ियों के लिए ऐसा खास वीआईपी नंबर पा सकते हैं? जी हां, कोई भी नागरिक ‘परिवहन फैंसी नंबर पोर्टल’ पर ऑनलाइन ई-नीलामी में भाग ले सकता है। केरल में एक अंक वाले फैंसी नंबर की शुरुआती बोली लगभग 1.5 लाख से 3 लाख रुपये तक होती है।

Author: Nikhil Nair

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