रिम्स में कथित फर्जी नामांकन और टेंडर घोटाले की जांच तेज, कई अधिकारियों पर लटकी तलवार

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Ranchi News: रिम्स में कथित फर्जी दाखिले और करोड़ों रुपये के टेंडर आवंटन मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सीआईडी (CID) की टीम को प्रारंभिक पड़ताल में कई अहम दस्तावेज हाथ लगे हैं। जांच में गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं, जिससे संस्थान के कई वरिष्ठ अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

दो बड़े मामलों पर सीआईडी की नजर

जांच टीम ने रिम्स प्रशासन से बड़ी तादाद में फाइलें और आधिकारिक दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच मुख्य रूप से दो मामलों पर केंद्रित है। पहला, वर्ष 2025 में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए एमबीबीएस कोर्स में दाखिला लेने का मामला है। दूसरा, सफाई व्यवस्था के टेंडर में नियमों में हेरफेर कर चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप है।

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फर्जी नामांकन में संगठित नेटवर्क की आशंका

सीआईडी अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या फर्जी नामांकन किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा हैं। इसके साथ ही टेंडर प्रक्रिया में किन स्तरों पर नियमों के साथ छेड़छाड़ की गई और इसमें किन अधिकारियों की मिलीभगत थी, इसका पता लगाया जा रहा है। जल्द ही संबंधित अधिकारियों से पूछताछ शुरू की जा सकती है।

निदेशक के इस्तीफे से बढ़े सवाल

इस बीच, रिम्स निदेशक के अचानक इस्तीफे ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। हालांकि, इस्तीफे के कारणों पर आधिकारिक रूप से चुप्पी साधी गई है, लेकिन जांच एजेंसी हर घटनाक्रम को सबूतों से जोड़कर देख रही है। दस्तावेजों की समीक्षा के बाद सीआईडी जल्द ही मामले में नियमित प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी कर रही है।

अधिकारियों की मुश्किलें होना तय है

अगर जांच के दौरान अनियमितताएं पूरी तरह साबित होती हैं, तो आने वाले दिनों में रिम्स से जुड़े कई बड़े अधिकारियों और निजी लोगों पर कानूनी शिकंजा कस सकता है। जांच टीम का फोकस इस बात पर है कि संस्थागत नियमों को ताक पर रखकर किसे लाभ पहुंचाया गया। अब सभी की निगाहें सीआईडी की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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