क्या आपको भी परेशान कर रहे हैं गुप्त शत्रु? आज ही करें मां दुर्गा का यह अचूक उपाय, परिघ योग में होगा दुश्मनों का नाश!

Delhi News: हिंदू धर्म शास्त्रों में शुक्रवार का दिन बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस दिन आमतौर पर धन की देवी माता लक्ष्मी के व्रत और पूजन का विधान है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शुक्रवार का दिन आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना के लिए भी अत्यंत विशेष होता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, शुक्रवार के दिन मां दुर्गा की पूजा करने से भक्तों के जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं। माता रानी प्रसन्न होकर अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। द्रिक पंचांग के मुताबिक, आज तड़के सुबह से ही आकाश मंडल में बेहद दुर्लभ ‘परिघ योग’ का निर्माण हो चुका है।

जानिए क्या होता है परिघ योग और इसका महत्व

ज्योतिष शास्त्र के कुल 27 योगों में से परिघ योग को 19वां स्थान प्राप्त है। परिघ का शाब्दिक अर्थ नगर का मुख्य द्वार या द्वार को बंद करने वाली लोहे की छड़ होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस विशेष और शक्तिशाली योग के स्वामी न्याय के देवता शनिदेव माने जाते हैं।

धार्मिक दृष्टिकोण से परिघ योग को शक्ति, साहस और विजय का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। यह योग शत्रुओं के लिए बेहद मारक सिद्ध होता है। इस शुभ अवधि में विरोधियों और शत्रुओं के खिलाफ किए गए कार्यों में निश्चित रूप से सफलता मिलती है और सभी गुप्त शत्रु परास्त होते हैं।

शुक्रवार को इस सरल विधि से करें मां दुर्गा की पूजा

इस शुभ योग में मां दुर्गा की विशेष कृपा पाने के लिए शुक्रवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ लाल रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में एक साफ चौकी पर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद पूरे विधि-विधान से माता रानी का पूजन शुरू करें।

मां दुर्गा के सामने गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें। इसके बाद माता रानी को लाल रंग के फूल, सिंदूर, ताजे फल और मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। अंत में कपूर से मां दुर्गा की आरती करके पूजा संपन्न करें।

आखिर शुक्रवार को क्यों की जाती है मां दुर्गा की पूजा?

शुक्रवार के दिन मां दुर्गा की पूजा करने के पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक कथा प्रचलित है। प्राचीन काल में जब देवताओं और असुरों के बीच भयंकर युद्ध चल रहा था, तब असुरों के गुरु शुक्राचार्य अपनी मृत संजीवनी विद्या की मदद से मृत राक्षसों को बार-बार जीवित कर देते थे।

गुरु शुक्राचार्य के इस चमत्कार के कारण असुरों को एक तरह से अमरत्व प्राप्त हो गया था। इस संकट से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव की शरण में पहुंचे। महादेव ने देवताओं को आदि शक्ति मां जगदंबा की आराधना करने की सलाह दी, जिसके बाद देवताओं ने माता से रक्षा की गुहार लगाई।

जब शुक्राचार्य ने मां दुर्गा को समर्पित किया यह दिन

देवताओं के अनुरोध पर आदिशक्ति मां दुर्गा ने अपने दिव्य तपोबल से गुरु शुक्राचार्य की मृत संजीवनी विद्या के प्रभाव को पूरी तरह से समाप्त कर दिया। संजीवनी मंत्र के निष्प्रभावी होते ही असुर कमजोर होने लगे। अपनी शक्ति क्षीण होते देख गुरु शुक्राचार्य को अपनी भूल का अहसास हुआ।

शुक्राचार्य भगवान शिव के परम भक्त थे, इसलिए उन्होंने महादेव से मार्गदर्शन मांगा। भगवान शिव के आदेश पर मां दुर्गा ने शुक्राचार्य को उनकी संजीवनी विद्या वापस लौटा दी। माता के इस प्रचंड रूप को देखकर शुक्राचार्य भयभीत हो गए और उन्होंने शुक्रवार का पूरा दिन मां दुर्गा की पूजा को समर्पित कर दिया।

Author: Pandit Balkrishan Sharma

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