Delhi News: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक बार फिर अपने सांगठनिक फैसलों से राजनीतिक गलियारों को चौंका दिया है। पार्टी ने केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। इससे पहले यूपी में भी केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को कमान सौंपी गई थी।
इस बड़े बदलाव के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या मोदी मंत्रिमंडल में जल्द ही फेरबदल होने वाला है। चूंकि बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत का कड़ाई से पालन करती है, इसलिए इन मंत्रियों को जल्द ही सरकारी जिम्मेदारी से मुक्त किया जा सकता है।
हर्ष मल्होत्रा पूर्वी दिल्ली से सांसद हैं और वर्तमान में मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री की भूमिका निभा रहे हैं। दिल्ली में आने वाले समय में होने वाले एमसीडी चुनावों को देखते हुए उनकी यह नई और बड़ी नियुक्ति राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पंजाब और दिल्ली को साधने की रणनीति
बीजेपी को दिल्ली में एक ऐसे जमीन से जुड़े पंजाबी और वैश्य चेहरे की तलाश थी, जिसकी प्रशासनिक पकड़ मजबूत हो। केंद्रीय मंत्री को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के लिए हर संभव कोशिश करेगी।
बीजेपी की कार्यशैली दूसरी राजनीतिक पार्टियों से काफी अलग मानी जाती है। पार्टी अपने ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के नियम को बेहद कड़ाई से लागू करती है। इतिहास गवाह है कि जब भी किसी नेता को सरकार से संगठन में भेजा गया, बड़े बदलाव हुए हैं।
इसका सबसे बड़ा और ताजा उदाहरण जेपी नड्डा का है। जब नड्डा को मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, तो उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी छोड़ दी। इसके बाद पार्टी ने सांगठनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव किया था।
यूपी में पंकज चौधरी को मिली कमान
कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को यूपी भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था। बीजेपी की नीति के अनुसार, जब कोई मंत्री संगठन के पूर्णकालिक काम में उतरता है, तो उसे सरकारी जिम्मेदारी छोड़नी पड़ती है।
अब यही इतिहास दिल्ली में हर्ष मल्होत्रा के साथ दोहराया जा रहा है। चूंकि दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में संगठन का काम चौबीसों घंटे का होता है, इसलिए इन दोनों ही मंत्रियों का केंद्रीय कैबिनेट से बाहर होना अब लगभग तय माना जा रहा है।
अगर इतिहास देखें तो जुलाई 2021 में मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा कैबिनेट फेरबदल किया था। उस समय रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर जैसे 12 बड़े मंत्रियों की छुट्टी करके उन्हें संगठन के काम में सक्रिय किया गया था।
Author: Gaurav Malhotra


