Himachal News: हिमाचल प्रदेश में नगर निगम मंडी चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता विरोधी लहर को खत्म करने के लिए नई रणनीति बनाई है। पार्टी ने कड़ा फैसला लेते हुए बारह वार्डों में बिल्कुल नए चेहरों को चुनावी मैदान में उतारा है। इस उलटफेर से कई दिग्गज नेताओं का टिकट कट गया है। चुनाव में पूर्व मंत्री और सदर विधायक अनिल शर्मा की पसंद को काफी प्राथमिकता मिली है।
पूर्व महापौर का कटा टिकट, कई दिग्गजों को लगा बड़ा झटका
मंडी निगम चुनाव में टिकट वितरण से सबसे बड़ा झटका पूर्व महापौर वीरेंद्र भट्ट को लगा है। आरक्षण रोस्टर में बदलाव के कारण उनका गृह वार्ड पुरानी मंडी महिला प्रत्याशी के लिए आरक्षित हो गया। इसके बाद वीरेंद्र भट्ट ने वार्ड एक खलियार से अपनी मजबूत दावेदारी पेश की थी। लेकिन पार्टी हाईकमान ने उन पर बिल्कुल भरोसा नहीं जताया। उनके स्थान पर पूर्व जिला अध्यक्ष रणवीर सिंह सेन को चुनाव लड़ने के लिए टिकट थमा दिया गया।
हरदीप सिंह ने बचाई साख, पंद्रह वार्डों के लिए भारी घमासान
पार्टी ने बैहना के पूर्व पार्षद कृष्ण भानु को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया है। दूसरी तरफ पैलेस कालोनी एक के पूर्व पार्षद हरदीप सिंह राजा अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करने में सफल रहे। आरक्षण के चलते वह खुद चुनाव नहीं लड़ सके। लेकिन उन्होंने अपनी पत्नी गुरदीप कौर को टिकट दिला दिया। भाजपा में पंद्रह वार्डों के लिए साठ से अधिक कार्यकर्ताओं ने आवेदन किया था। इससे पार्टी के भीतर भारी प्रतिस्पर्धा का साफ अंदाजा लगता है।
इन पुराने और दिग्गज चेहरों पर भाजपा ने फिर जताया भरोसा
भाजपा ने केवल जिताऊ और ऊर्जावान चेहरों पर दांव लगाया है। कई बड़े चेहरों के कटने के बावजूद कुछ पुराने पार्षद अपना टिकट बचाने में कामयाब रहे। सुमन ठाकुर, नेहा कुमारी और वीरेंद्र आर्य को अपने पिछले शानदार प्रदर्शन के आधार पर दोबारा टिकट मिल गया है। इसके साथ ही समखेतर की पूर्व पार्षद निर्मल कुमारी ने इस बार पड्डल वार्ड से टिकट हासिल किया है। अब देखना है कि भाजपा के नए सिपाही जनता को कितना लुभाते हैं।


