Punjab News: पंजाब नगर निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया है। दिल्ली में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के सामने हुई समीक्षा बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के बीच तीखी बहस हुई। प्रताप सिंह बाजवा के जल्दी निकलने से विवाद और बढ़ गया।
कांग्रेस के लिए यह झटका केवल सीटों तक सीमित नहीं दिख रहा है। पार्टी अब नेतृत्व, जवाबदेही और 2027 की रणनीति पर दबाव में है। शहरी निकायों में आप ने मजबूत पकड़ दिखाई, जबकि कांग्रेस कई पुराने गढ़ों में पिछड़ गई। बैठक में नेताओं ने हार के कारणों पर खुलकर सवाल उठाए।
गिद्दरबाहा हार ने बढ़ाई वारिंग की मुश्किलें
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा गिद्दरबाहा के नतीजों पर हुई। यह क्षेत्र पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग का मजबूत इलाका माना जाता है। इसके बावजूद यहां 19 में से 17 वार्ड आप ने जीत लिए। कांग्रेस केवल दो वार्डों पर सिमट गई। इसी नतीजे ने नेतृत्व पर सवाल तेज कर दिए।
जालंधर के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बैठक में वारिंग की भूमिका पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश अध्यक्ष अपने इलाके में पार्टी को नहीं बचा पाए, तो कार्यकर्ताओं को 2027 के लिए कैसे तैयार किया जाएगा। चन्नी का यह सवाल बैठक का सबसे तीखा पल माना गया।
वारिंग ने हार के लिए आम आदमी पार्टी पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई जगह प्रशासनिक दबाव ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया। हालांकि पार्टी के भीतर ही इस दलील पर सवाल उठे। नेताओं ने पूछा कि अगर दबाव हर जगह था, तो कांग्रेस कुछ इलाकों में कैसे जीत गई।
चन्नी के गढ़ में कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शन
चन्नी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा। मोरिंडा नगर परिषद में कांग्रेस ने 15 में से 10 वार्ड जीते। चमकौर साहिब में भी पार्टी ने मजबूत मौजूदगी दिखाई। इसी कारण चन्नी समर्थक इसे संगठन की पकड़ का उदाहरण बता रहे हैं। इससे राज्य इकाई में शक्ति संतुलन की बहस तेज हुई।
गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी वारिंग की दलील पर सवाल उठाए। उन्होंने कपूरथला और चमकौर साहिब का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि समान राजनीतिक हालात में भी कांग्रेस वहां बेहतर कर सकी। इसके बाद वारिंग ने चन्नी की चुनाव प्रचार से दूरी का मुद्दा उठाया। चन्नी ने निजी कारण बताए।
कपूरथला का परिणाम कांग्रेस के लिए राहत लेकर आया। यहां राणा गुरजीत सिंह के प्रभाव में पार्टी ने 50 में से 31 वार्ड जीतकर स्पष्ट बढ़त बनाई। आप यहां पीछे रह गई। इस जीत ने कांग्रेस को यह कहने का मौका दिया कि सही स्थानीय नेतृत्व और मजबूत बूथ प्रबंधन से मुकाबला अभी खत्म नहीं हुआ है।
बाजवा के जल्दी निकलने पर उठे सवाल
बैठक का माहौल तब और गरम हो गया, जब पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा बैठक खत्म होने से पहले निकल गए। इससे राजनीतिक अटकलें तेज हो गईं। कुछ रिपोर्टों में इसे नाराजगी से जोड़ा गया। हालांकि कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने कहा कि बाजवा ने पहले ही जाने की जानकारी दे दी थी।
बाजवा ने भी बाद में वॉकआउट की खबरों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पंजाब के हालात पर करीब 15 से 20 मिनट तक अपनी बात रखी। इसके बाद अनुमति लेकर वह जालंधर लौट गए। उनके अनुसार, गुस्से में बैठक छोड़ने की बात आधारहीन है। फिर भी इस घटना ने असहजता जरूर बढ़ाई।
पंजाब निकाय चुनावों में आप ने 900 से ज्यादा वार्ड जीतकर शहरी क्षेत्रों में मजबूत संदेश दिया। कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही, पर उसके कई बड़े चेहरे अपने क्षेत्रों में कमजोर दिखे। निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी चौंकाने वाला रहा। भाजपा और अकाली दल ने कुछ इलाकों में उपस्थिति दर्ज कराई, मगर लहर आप के पक्ष में दिखी।
कांग्रेस नेतृत्व ने बैठक में साफ संकेत दिया कि पंजाब संगठन को अब साझा रणनीति पर काम करना होगा। भूपेश बघेल ने फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि चर्चा चुनावी समीक्षा और 2027 की तैयारी पर केंद्रित रही। हाईकमान ने नेताओं को एकजुट होकर आगे बढ़ने की सलाह दी।
इन नतीजों ने कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती रख दी है। पार्टी को शहरी मतदाता दोबारा जोड़ने होंगे और भीतर की खींचतान भी रोकनी होगी। अगर चन्नी, वारिंग और बाजवा जैसे बड़े चेहरे अलग-अलग संदेश देते रहे, तो आप को 2027 से पहले मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सकती है।
Author: Gurpreet Singh

