सियासी हलचल: राघव चड्ढा समेत 7 सांसद BJP में शामिल, लेकिन ‘आधिकारिक एंट्री’ में फंसा ये पेंच

Delhi News: आम आदमी पार्टी में मची ऐतिहासिक बगावत के बीच राघव चड्ढा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सनसनी फैला दी है। राघव ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ भारतीय जनता पार्टी के दफ्तर पहुंचकर प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। इस दौरान नितिन नवीन ने मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया, जिससे उनके पाला बदलने पर मुहर लग गई। हालांकि, सात सांसदों के दावे के बावजूद चड्ढा के साथ केवल दो अन्य सांसद ही नजर आए, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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क्यों रुकी है आधिकारिक ज्वाइनिंग?

बीजेपी अध्यक्ष से मुलाकात और स्वागत के बावजूद राघव चड्ढा और उनके साथी अभी आधिकारिक तौर पर भाजपा का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। इसके पीछे एक बड़ी तकनीकी अड़चन है। नियमानुसार, इन नेताओं की सदस्यता तभी सुरक्षित रहेगी और विलय प्रभावी माना जाएगा, जब राज्यसभा के सभापति इसे मंजूरी दे देंगे। सभापति की मुहर लगने के बाद ही ये सांसद संसद के उच्च सदन में आधिकारिक रूप से भाजपा के सदस्य कहलाएंगे।

संविधान के प्रावधानों का दिया हवाला

राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने संविधान के प्रावधानों के तहत दो-तिहाई सांसदों के साथ बीजेपी में विलय का फैसला किया है। उन्होंने सभी सात बागी सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र राज्यसभा सभापति को सौंप दिया है। चड्ढा का दावा है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से जाकर ये दस्तावेज जमा किए हैं। दलबदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई बहुमत का यह आंकड़ा बेहद महत्वपूर्ण है।

बाकी चार सांसदों की ‘मिस्ट्री’

प्रेस कॉन्फ्रेंस और बीजेपी मुख्यालय में सात में से केवल तीन ही सांसद (राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल) दिखाई दिए। बाकी चार सांसदों की अनुपस्थिति पर चर्चाएं गर्म हैं। सूत्रों के अनुसार, स्वाति मालीवाल पूर्वोत्तर में हैं, हरभजन सिंह आईपीएल में व्यस्त हैं और राजेंद्र गुप्ता इलाज के लिए विदेश गए हुए हैं। वहीं, विक्रमजीत साहनी दिल्ली में होने के बावजूद तबीयत खराब होने की बात कहकर सामने नहीं आ रहे हैं।

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‘गलत पार्टी में सही व्यक्ति था मैं’

अपनी पुरानी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने ‘आप’ को अपने खून-पसीने से सींचा था। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को 15 साल दिए, वह अब अपने मूल सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से पूरी तरह भटक चुकी है। चड्ढा के अनुसार, पार्टी अब देशहित के बजाय निजी स्वार्थों के लिए काम कर रही है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों से उन्हें महसूस हो रहा था कि वह गलत पार्टी में एक सही व्यक्ति हैं।

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