Maharashtra News: महाराष्ट्र से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बुधवार को मामले के मुख्य दोषी शरद कलास्कर को जमानत दे दी है। कोर्ट ने उसकी आजीवन कारावास की सजा को भी निलंबित कर दिया है। यह फैसला कई लोगों के लिए काफी चौंकाने वाला है। इस बहुचर्चित हत्याकांड ने पूरे देश में भारी सनसनी फैलाई थी और लंबी बहस छिड़ गई थी।
चश्मदीदों की गवाही और पहचान पर उठे गंभीर सवाल
जस्टिस अजेय गडकरी और जस्टिस रणजीतसिंह भोंसले की बेंच ने इस मामले की गहन सुनवाई की। सुनवाई के दौरान जजों ने कथित हमलावर के रूप में कलास्कर की पहचान पर गहरा संदेह व्यक्त किया। अदालत ने मामले के दो मुख्य चश्मदीद गवाहों की विश्वसनीयता पर भी कई गंभीर सवाल उठाए हैं। इन्हीं अहम कानूनी खामियों के आधार पर अदालत ने सजा पर रोक लगाने का फैसला किया। पुलिस की जांच प्रक्रिया और सबूतों को लेकर अदालत का यह रुख काफी सख्त नजर आया।
जमानत के लिए अदालत ने तय की सख्त शर्तें
हाई कोर्ट ने जमानत देने के साथ ही शरद कलास्कर पर कुछ बेहद सख्त शर्तें भी लगाई हैं। आरोपी को अपनी रिहाई के लिए पचास हजार रुपये का निजी मुचलका भरना होगा। इसके अलावा उसे हर महीने पुणे के डेक्कन पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी। इसी पुलिस स्टेशन में दाभोलकर की हत्या की पहली एफआईआर दर्ज की गई थी। इन कड़ी शर्तों का पालन करना उसके लिए अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर उसकी जमानत तुरंत रद्द की जा सकती है।
विशेष अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में दी चुनौती
इसी साल दो हजार चौबीस में एक विशेष अदालत ने कलास्कर को इस जघन्य हत्याकांड में दोषी ठहराया था। विशेष अदालत ने उसे कड़ी उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद कलास्कर ने इस सजा को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उसने अपनी अपील पर अंतिम सुनवाई और फैसला आने तक जमानत की गुहार लगाई थी। हाई कोर्ट ने लंबी बहस सुनने के बाद अब उसे यह राहत प्रदान की है। अब इस मामले की अंतिम सुनवाई का इंतजार है।
गोविंद पानसरे मर्डर केस में भी आरोपी है कलास्कर
शरद कलास्कर का आपराधिक इतिहास केवल इसी मामले तक सीमित नहीं है। उस पर मशहूर कम्युनिस्ट नेता गोविंद पानसरे की हत्या का भी गंभीर मुकदमा चल रहा है। पिछले साल अक्टूबर में हाई कोर्ट ने उसे पानसरे मामले में पहले ही जमानत दे दी थी। अब नरेंद्र दाभोलकर मामले में भी जमानत मिलने के बाद कलास्कर के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। उसके बाहर आने से सामाजिक संगठनों में काफी रोष देखने को मिल सकता है।
अगस्त 2013 में हुई थी दाभोलकर की निर्मम हत्या
नरेंद्र दाभोलकर महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक और एक निडर समाज सुधारक थे। बीस अगस्त दो हजार तेरह को उनकी बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। वह सुबह पुणे में सैर के लिए निकले थे। उसी समय मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए दो अज्ञात हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। इस दर्दनाक घटना ने पूरे महाराष्ट्र की राजनीति और समाज को हिलाकर रख दिया था। अंधविश्वास के खिलाफ उनकी लंबी लड़ाई को लोग आज भी याद करते हैं।


