Parliament में आज से महिला आरक्षण बिल पर ऐतिहासिक बहस, PM मोदी होंगे मुख्य वक्ता, लोकसभा सीटें बढ़कर 850 होंगी

Parliament News: संसद में महिला आरक्षण संशोधन बिल पर आज से अहम चर्चा शुरू हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में इस बिल पर अपना वक्तव्य देंगे। गृह मंत्री अमित शाह चर्चा का जवाब देंगे। लोकसभा में 16 और 17 अप्रैल को कुल 18 घंटे चर्चा होगी, जिसके बाद वोटिंग कराई जाएगी। राज्यसभा में 18 अप्रैल को 10 घंटे की चर्चा और वोटिंग होगी।

लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव

संशोधित बिल के अनुसार लोकसभा की सदस्य संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 की जाएगी। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें होंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव है। नए परिसीमन में 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। बिल में साफ किया गया है कि जनसंख्या का मतलब उसी जनगणना से होगा जिसके आंकड़े प्रकाशित हो चुके हैं।

2029 के चुनाव से लागू होगा 33% महिला आरक्षण

नारी शक्ति वंदन अधिनियम सितंबर 2023 में पहले ही पारित हो चुका है। अब सरकार इसे संशोधित कर 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की तैयारी में है। इस कानून के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में महिलाओं को एक-तिहाई सीटें आरक्षित होंगी। यह आरक्षण 15 साल तक यानी 2029, 2034 और 2039 के चुनावों तक लागू रहेगा। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी इसमें आरक्षण शामिल होगा।

हर चुनाव में बदलेंगी आरक्षित सीटें, परिसीमन आयोग का होगा गठन

बिल में प्रावधान है कि हर चुनाव में आरक्षित सीटों को बदला जाएगा, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिल सके। बिल पास होने के बाद परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा। आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे। यह आयोग लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों का नए सिरे से परिसीमन करेगा। रिपोर्ट पर जनता से सुझाव मांगे जाएंगे और सरकार की मंजूरी के बाद गजट अधिसूचना जारी की जाएगी।

लोकसभा में 18 घंटे, राज्यसभा में 10 घंटे चर्चा तय

लोकसभा में इस बिल पर कुल 18 घंटे की चर्चा निर्धारित की गई है। प्रधानमंत्री मोदी सरकार के पक्ष में तर्क रखेंगे। इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब देंगे। राज्यसभा में 18 अप्रैल को 10 घंटे की चर्चा होगी, जिसके बाद वोटिंग कराई जाएगी। इसी दौरान राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव भी होगा। सरकार का लक्ष्य है कि यह पूरा प्रावधान 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले लागू हो जाए। यह बिल भारतीय संसद के इतिहास में महिला सशक्तिकरण की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।

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