Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी विश्राम गृहों की सूरत अब पूरी तरह बदलने वाली है। राज्य सरकार ने इन विश्राम गृहों की कई अहम सेवाओं को निजी हाथों में सौंपने का बड़ा फैसला लिया है। सुक्खू सरकार इन भवनों में खानपान, सफाई और सुंदरीकरण का काम आउटसोर्स करेगी। इस फैसले का मकसद इन ‘सफेद हाथियों’ को मुनाफे में लाना है।
जल शक्ति, लोक निर्माण और वन विभाग के पास प्रदेश में सबसे ज्यादा विश्राम गृह हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को विधानसभा में यह अहम जानकारी साझा की। उन्होंने विधायक केवल सिंह पठानिया के एक सवाल का जवाब देते हुए सरकार की नई योजना का खुलासा किया।
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि निजीकरण के बावजूद मनमानी लूट नहीं होगी। सरकार खाने-पीने की चीजों के लिए एक सख्त रेट लिस्ट तय करेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि विश्राम गृहों में ठहरने वाले आम लोगों को उचित दाम पर ही सभी सेवाएं मिल सकें।
ऑनलाइन बुकिंग से खजाना भर रही सरकार
विधायक पठानिया ने सदन में भारी खर्च और कम आय का मुद्दा उठाया था। उन्होंने इन विश्राम गृहों को ‘सफेद हाथी’ करार दिया था। इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी ऑनलाइन बुकिंग से जुड़े शानदार आंकड़े पेश किए।
जल शक्ति विभाग के 81 विश्राम गृह अब ऑनलाइन बुकिंग के लिए मौजूद हैं। इनमें किसान भवन और निरीक्षण कुटीर भी शामिल हैं। पिछले एक साल यानी 31 जनवरी 2026 तक इन भवनों से सरकार को 88.71 लाख रुपये की शानदार कमाई हुई है।
सरकार ने 21 जनवरी 2026 से इन भवनों की ऑनलाइन बुकिंग शुरू की थी। अब आम जनता घर बैठे आसानी से अपने लिए कमरा बुक कर सकती है। हालांकि, कमरे खाली होने पर लोगों को पुरानी ऑफलाइन बुकिंग की सुविधा भी मिलती रहेगी।
जल जीवन मिशन के बजट पर केंद्र से तकरार
इस नई ऑनलाइन व्यवस्था से आम लोगों को काफी सहूलियत मिली है। इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार पर भी कड़ा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने जल जीवन मिशन के पैसे से विश्राम गृह बना दिए थे।
इस बड़ी गड़बड़ी के कारण केंद्र सरकार ने राज्य का 27 करोड़ रुपये का बजट काट लिया है। यह हिमाचल प्रदेश के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक झटका है। हालांकि, सरकार ने सदन में विश्राम गृह के अधूरे काम को जल्द पूरा करने का पक्का भरोसा दिया है।


