India News: केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने देशभर में व्यावसायिक एलपीजी यानी कमर्शियल गैस सिलेंडर की वितरण प्रणाली में बड़ा फेरबदल कर दिया है। अब शादी-ब्याह, भंडारे, धार्मिक आयोजन या किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए गैस सिलेंडर लेना आसान नहीं होगा। नए नियमों के मुताबिक, उपभोक्ताओं को अब जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक के पास लिखित आवेदन देना अनिवार्य होगा। सरकार का मकसद वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाना और सिलेंडरों की कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम कसना है।
इस नई व्यवस्था को अमली जामा पहनाने के लिए जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच करेगी। कार्यक्रम के आकार और वास्तविक जरूरत को देखने के बाद ही सिलेंडर आवंटन को हरी झंडी दी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से सिलेंडरों का दुरुपयोग रुकेगा और जरूरतमंदों को समय पर गैस मिल सकेगी।
सरकार ने सिलेंडरों के वितरण के लिए एक स्पष्ट कोटा भी निर्धारित कर दिया है। इसमें सबसे ज्यादा प्राथमिकता शिक्षा क्षेत्र को दी गई है। शिक्षण संस्थानों के लिए 37 प्रतिशत कोटा आरक्षित किया गया है। होटल और रेस्टोरेंट के लिए 36 प्रतिशत आपूर्ति तय की गई है। वहीं सामाजिक समारोहों, दवा उद्योगों, सरकारी कैंटीन और धार्मिक आयोजनों के लिए 9-9 प्रतिशत का कोटा सुरक्षित रखा गया है।
मांग को देखते हुए 20 फीसदी अतिरिक्त आवंटन
व्यावसायिक गैस की बढ़ती मांग और किल्लत की खबरों के बीच सरकार ने राज्यों को राहत भी दी है। अब राज्यों को निर्धारित कोटे से 20 प्रतिशत अधिक अतिरिक्त आवंटन करने की अनुमति दी गई है। इससे डेयरी, होटल और औद्योगिक इकाइयों को काम सुचारू रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस अतिरिक्त कोटे का लाभ लेने के लिए तेल कंपनियों के पास पंजीकरण कराना जरूरी होगा।
19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग करने वाले ग्राहकों को अब अपनी पहचान और जरूरत के दस्तावेज जमा करने होंगे। यह पंजीकरण संबंधित गैस एजेंसी या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी उपभोक्ता को अतिरिक्त कोटे का लाभ नहीं दिया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे वितरण की एक-एक कड़ी पर कड़ी नजर रखेंगे।
अधिकारियों का कहना है कि बाजारों में सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है, लेकिन सुचारू सप्लाई के लिए नियमों को सख्त किया गया है। जो उपभोक्ता बार-बार अतिरिक्त गैस की मांग कर रहे हैं, उन्हें अब पीएनजी (PNG) कनेक्शन के लिए आवेदन करने का सुझाव दिया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि व्यावसायिक क्षेत्रों में पाइप वाली गैस को बढ़ावा दिया जाए ताकि सिलेंडरों पर बोझ कम हो सके।
जमाखोरी और दुरुपयोग पर प्रशासन की पैनी नजर
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, शादी-ब्याह के सीजन में अक्सर सिलेंडरों की कृत्रिम कमी पैदा कर दी जाती है। कुछ लोग अधिक मुनाफा कमाने के लिए सिलेंडरों का भंडारण कर लेते हैं। नई कमेटी अब सीधे तौर पर ऐसे तत्वों पर कार्रवाई करेगी। किसी भी बड़े कार्यक्रम के लिए सिलेंडरों की संख्या का निर्धारण अब आवेदक की हैसियत नहीं, बल्कि कमेटी की रिपोर्ट तय करेगी।
आवेदकों को अब अपने कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र या समारोह की अनुमति का पत्र आवेदन के साथ जोड़ना होगा। जिला खाद्य आपूर्ति विभाग के पास अब यह अधिकार होगा कि वह किसी भी समय कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर सके। यदि वहां निर्धारित संख्या से अधिक सिलेंडर पाए जाते हैं, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे छोटे दुकानदारों और आम जनता को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार का यह फैसला दूरगामी परिणामों वाला साबित हो सकता है। इससे न केवल गैस की बर्बादी रुकेगी, बल्कि सुरक्षा मानकों का पालन भी सुनिश्चित होगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि आम जनता और व्यापारियों के लिए यह कागजी प्रक्रिया कितनी चुनौतीपूर्ण साबित होती है। फिलहाल, प्रशासन ने इसे पूरी तरह लागू करने के लिए जिला स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं।


