पश्चिम बंगाल में ममता युग का अंत: राज्यपाल ने विधानसभा भंग की, भाजपा की प्रचंड जीत के बाद बड़ा संवैधानिक उलटफेर

West Bengal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व संवैधानिक घटनाक्रम देखने को मिला। राज्यपाल आर.एन. रवि ने एक कड़ा कदम उठाते हुए राज्य विधानसभा को तत्काल प्रभाव से भंग करने का आदेश दे दिया है। यह निर्णय तब आया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव हारने के बावजूद इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। इस आदेश के साथ ही बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का 15 साल पुराना शासन आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है।

राज्यपाल ने क्यों उठाया यह सख्त कदम?

विधानसभा चुनाव के परिणाम 4 मई को घोषित हुए थे, जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने 200 से अधिक सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत प्राप्त किया है। ऐतिहासिक हार के बाद भी ममता बनर्जी पद पर बनी हुई थीं, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत था। राज्यपाल ने संवैधानिक संकट को टालने के लिए अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग किया। कोलकाता गजट में अधिसूचना प्रकाशित होते ही पूरी कैबिनेट स्वतः ही भंग हो गई है।

संविधान के तहत हुई पूरी कार्यवाही

राज्य के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 7 मई से विधानसभा अस्तित्व में नहीं रहेगी। संविधान का अनुच्छेद 172 स्पष्ट करता है कि कार्यकाल समाप्त होने या बहुमत खोने पर सदन को भंग किया जा सकता है। चूंकि मुख्यमंत्री ने खुद पद नहीं छोड़ा, इसलिए राज्यपाल को संवैधानिक मर्यादा बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। अब राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है और भाजपा को न्योता मिल सकता है।

बंगाल में अब आगे क्या होगा?

विधानसभा भंग होने के बाद वर्तमान सरकार केवल कार्यवाहक सरकार के रूप में सीमित समय के लिए काम करेगी। राज्यपाल अब सबसे बड़े दल भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे। भाजपा के पास बहुमत के आंकड़े से कहीं ज्यादा सीटें हैं, इसलिए फ्लोर टेस्ट की कोई चुनौती नहीं होगी। नई विधानसभा के गठन के बाद नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। बंगाल में डेढ़ दशक बाद सत्ता का यह हस्तांतरण काफी नाटकीय रहा है।

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