Himachal News: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल काविंदर गुप्ता ने रविवार को शिमला के लोक भवन में वरिष्ठ नागरिकों के एक विशेष प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने बुजुर्गों को समाज की सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक अनुभव का असली संरक्षक बताया। राज्यपाल ने राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को रेखांकित करते हुए विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी, पूर्व सैनिक और शिक्षाविद शामिल हुए। सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के जमीन पर पड़ रहे सकारात्मक प्रभावों को साझा किया।
बुजुर्गों ने आयुष्मान भारत और पेंशन योजनाओं को सराहा
बैठक में मौजूद वरिष्ठ नागरिकों ने केंद्र सरकार की ‘आयुष्मान भारत’, ‘प्रधानमंत्री वय वंदना योजना’ और ‘सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम’ की जमकर तारीफ की। उनका मानना था कि इन योजनाओं ने न केवल उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा दी है, बल्कि आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बनाया है। बुजुर्गों ने कहा कि अब वे समाज में पूरे सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं। राज्यपाल ने इन सुझावों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों तक सरकारी योजनाओं का पहुंचना सामाजिक सुरक्षा की मजबूती के लिए सबसे जरूरी कदम है।
युवाओं को नैतिक मूल्यों से जोड़ने की अपील
राज्यपाल काविंदर गुप्ता ने बातचीत के दौरान एक महत्वपूर्ण पक्ष रखा। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपनी अगली पीढ़ी यानी युवाओं के साथ जीवन के सबक साझा करें। उन्होंने कहा कि आज के तकनीकी दौर में बच्चों के भीतर ईमानदारी, संवेदनशीलता और बड़ों के प्रति सम्मान जैसे संस्कारों को जगाना बहुत आवश्यक है। राज्यपाल के अनुसार, वरिष्ठ नागरिक युवाओं को राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना से प्रेरित कर सकते हैं। इससे समाज की नैतिक नींव और अधिक मजबूत होगी।
सामाजिक जागरूकता के लिए बुजुर्ग बनेंगे ‘दूत’
राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल से अपील की कि वे अपने-अपने इलाकों में सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाएं। उनका उद्देश्य है कि समाज का कोई भी जरूरतमंद बुजुर्ग इन सुविधाओं से वंचित न रहे। राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि ‘विकसित और समावेशी भारत’ का सपना तभी सच होगा जब समाज के सभी वर्ग एक साथ आगे बढ़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। समाज की भलाई के लिए बुजुर्गों की सहभागिता भविष्य में और भी महत्वपूर्ण होगी।


