Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अब रोबोटिक सर्जरी की आधुनिक सुविधा मिलने लगी है। राज्य सरकार इस नई तकनीक को आयुष्मान भारत और हिमकेयर जैसी स्वास्थ्य योजनाओं के पैकेज में शामिल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि पूरी तरह से विकसित होने के बाद ही इसे इन योजनाओं का हिस्सा बनाया जाएगा। फिलहाल मरीजों को रोबोटिक सर्जरी के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। हालांकि, सरकारी कर्मचारियों को इसका मेडिकल रीइंबर्समेंट जरूर मिलेगा। गरीब मरीजों को राहत देने के लिए सुक्खू सरकार सर्जरी पर 70 हजार रुपये तक की भारी सब्सिडी दे रही है। वहीं, हिमकेयर योजना का फिलहाल आंतरिक ऑडिट चल रहा है।
मरीजों को मिल रही 70 हजार रुपये तक की सब्सिडी
विधानसभा में मुख्यमंत्री ने बताया कि स्पेशल वार्ड लेकर इलाज करवाने वाले मरीजों से रोबोटिक सर्जरी का पूरा शुल्क लिया जाता है। आम मरीजों के लिए फीस तय कर दी गई है। 18 जनवरी 2026 तक मरीजों से 30 हजार रुपये लिए जा रहे थे। 19 जनवरी के बाद से यह फीस 50 हजार रुपये कर दी गई है। एक रोबोटिक सर्जरी का कुल अनुमानित खर्च 90 हजार से 1.20 लाख रुपये तक आता है। इस खर्च का एक बड़ा हिस्सा सरकार खुद वहन कर रही है। मरीजों को 70 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है ताकि उन पर आर्थिक बोझ कम पड़े।
एम्स से भी सस्ती खरीदी गईं करोड़ों की रोबोटिक मशीनें
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने मशीनों की खरीद का पूरा ब्यौरा पेश किया। सरकार ने शुरुआत में केवल दो मशीनों का टेंडर निकाला था। बाद में जरूरत पड़ने पर इसी टेंडर पर दो और मशीनें खरीदी गईं। चमियाणा और टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए 28 करोड़ 44 लाख रुपये से अधिक में मशीनें आईं। वहीं आईजीएमसी, हमीरपुर और नेरचौक के लिए 27 करोड़ 5 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए गए। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि हिमाचल सरकार ने ये मशीनें दिल्ली एम्स अस्पताल से भी एक करोड़ रुपये सस्ती खरीदी हैं। सोलन के लिए भी मशीन खरीदनी थी, लेकिन कंपनी ने कीमत बढ़ने की बात कहकर इनकार कर दिया।
आयुष्मान और हिमकेयर में शामिल करने की उठी मांग
नेता प्रतिपक्ष ने रोबोटिक सर्जरी को तुरंत आयुष्मान और हिमकेयर योजना में शामिल करने की जोरदार वकालत की है। उनका तर्क है कि इन योजनाओं के बिना आम और गरीब आदमी इतनी महंगी सर्जरी का खर्च बिल्कुल नहीं उठा सकता। सरकार ने जवाब दिया है कि तकनीक के पूरी तरह प्रायोगिक होने के बाद इसे लागू किया जाएगा। विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि मेडिकल कॉलेजों में पुरानी एमआरआई मशीनों को भी तेजी से बदला जा रहा है। राज्य में अब तक 216 रोबोटिक सर्जरी और 20 हजार 770 लेप्रोस्कोपिक सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं।
लाखों का खर्च अब एक लाख के भीतर सिमटा
मरीजों को अब जोनल अस्पताल से मेडिकल कॉलेज तक धक्के खाने और भारी पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है। पहले गंभीर बीमारियों के इलाज पर मरीजों के दो-दो लाख रुपये खर्च हो जाते थे। अब आधुनिक रोबोटिक सर्जरी से यह पूरा इलाज एक लाख रुपये के भीतर हो रहा है। अस्पतालों में इस वक्त यूरोलॉजी, गायनी और जनरल सर्जरी बेहतरीन तरीके से की जा रही है। मरीजों को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं देना सरकार की पहली प्राथमिकता बन गई है।
डॉक्टरों और स्टाफ को मिल रही विशेष तकनीकी ट्रेनिंग
करोड़ों की इन मशीनों को चलाने के लिए विशेष कौशल की जरूरत होती है। जो कंपनी ये मशीनें सप्लाई कर रही है, वही डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को खास ट्रेनिंग भी दे रही है। इतना ही नहीं, यह कंपनी अगले पांच साल तक इन रोबोटिक मशीनों का पूरा रखरखाव भी करेगी। स्वास्थ्य विभाग के अब तक 20 डॉक्टरों, 10 ओटीए और नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षित किया जा चुका है। सरकार आने वाले समय में अपने डॉक्टरों को नई तकनीक सीखने के लिए एक्सपोजर विजिट पर बाहर भेजने की तैयारी भी कर रही है।


