राधिका आनंद ने सेना के साथ मिलकर रचा इतिहास, ‘मिशन फलवन’ से देश में लगा दिए 10 लाख से ज्यादा फलदार पेड़!

Delhi News: मशहूर पर्यावरणविद् और ‘प्लांटोलॉजी’ की सीईओ राधिका आनंद ने अपने अनूठे संकल्प ‘मिशन फलवन’ को एक बड़ा राष्ट्रीय अभियान बना दिया है। उन्होंने भारत के अलग-अलग राज्यों में अब तक 10 लाख से ज्यादा फलदार पेड़ लगाकर पर्यावरण संरक्षण की एक नई और अद्भुत मिसाल पेश की है।

राधिका आनंद मुख्य रूप से भारतीय सेना, पैरामिलिट्री फोर्सेस और विभिन्न सरकारी संस्थानों के मजबूत सहयोग से इस देशव्यापी ‘मिशन फलवन’ का संचालन करती हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के खास मौके पर उन्होंने टीवी9 भारतवर्ष से अपनी इस प्रेरणादायक यात्रा के बारे में खुलकर बातचीत की।

दादा और पिता से विरासत में मिला प्रकृति के प्रति अटूट प्यार

राधिका आनंद ने बताया कि बचपन की यादें ही इंसान की असली पहचान बनती हैं। उनके दादा जम्मू-कश्मीर में फॉरेस्ट ऑफिसर थे और उनके पिता ने भी वनस्पति विज्ञान में एमएससी की थी। पिता बाद में एयरफोर्स में शामिल हो गए, लेकिन पौधों के प्रति उनका प्यार हमेशा बरकरार रहा।

पिता ने पर्यावरण के प्रति जो गहरा प्यार राधिका के भीतर बोया था, वही बीज आज ‘मिशन फलवन’ के रूप में एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। राधिका ने इस मिशन की टैगलाइन ‘फ्रूट फॉर ऑल’ रखी है, जिसका उद्देश्य सृष्टि के हर छोटे-बड़े जीव को भोजन देना है।

जब दिल्ली और केंद्र सरकार से नहीं मिली जमीन और पानी

साल 2014 में राधिका ने अपनी खुद की कमाई को पर्यावरण में वापस लगाने का फैसला किया। जब वह इस योजना को लेकर दिल्ली सरकार के पास गईं, तो उन्होंने जमीन की कमी का बहाना बनाया। वहीं केंद्र सरकार ने राज्यों में सूखे और पानी की किल्लत की बात कही।

सरकारी तंत्र और औद्योगिक घरानों से निराशा हाथ लगने के बाद, साल 2014 में ही एक ट्रेन यात्रा के दौरान राधिका की मुलाकात एक आर्मी ऑफिसर से हुई। उन्होंने ऑफिसर को देश भर में फलदार पौधे लगाने के अपने अटूट जुनून और व्यक्तिगत खर्च की पूरी बात बताई।

Radhika Anand

दुश्मन देश के सामने सेना संग बनाई ‘हरी दीवार’

अगले ही दिन वेस्टर्न कमांड के तत्कालीन चीफ जनरल केजे सिंह ने राधिका को बुलाकर भारतीय सेना की तरफ से पार्टनरशिप का हाथ बढ़ाया। राधिका ने बताया कि जो जांबाज देश बचा लेते हैं, उनके लिए पौधों की सुरक्षा करना बेहद आसान और मामूली काम है।

सेना की कड़ी निगरानी के कारण उनके लगाए पौधों का सर्वाइवल रेट 90 फीसदी से भी ज्यादा है। जुलाई 2015 में सेना के साथ मिलकर उन्होंने पूरे पंजाब बॉर्डर पर 85,000 पौधे लगाए। इस पर वेस्टर्न कमांड के चीफ ने उन्हें दुश्मन के सामने ‘हरी दीवार’ बनाने का श्रेय दिया।

NSG, BSF और CISF की बनीं पहली ‘ग्रीन एंबेसडर’

सेना के साथ काम करने के दौरान ही राधिका के काम से प्रभावित होकर अधिकारियों ने उन्हें अन्य बलों से जोड़ा। वह देश की प्रतिष्ठित सुरक्षा एजेंसियों जैसे एनएसजी (NSG), सीआईएसएफ (CISF) और बीएसएफ (BSF) की पहली आधिकारिक ‘ग्रीन एंबेसडर’ भी चुनी गईं।

शुरुआत में एक अकेली महिला के रूप में उन्हें कई सामाजिक और व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेकिन उनके इस जज्बे को देखकर उनके ससुर बेहद प्रभावित हुए। उनकी पारिवारिक कंपनी ‘पारिजात इंडस्ट्री’ ने हर साल अपने सीएसआर (CSR) फंड का एक हिस्सा राधिका की कंपनी को देना शुरू किया।

घर में बनाएं नासा प्रमाणित नेचुरल ‘ऑक्सीजन चैंबर’

जमीन की कमी की शिकायत करने वाले शहरी लोगों को राधिका ने बालकनी, किचन स्लैब या ऑफिस डेस्क पर पौधे उगाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि सेंसवेरा (स्नेक प्लांट) रात में भी 24 घंटे ऑक्सीजन देता है। इसके अलावा एरिका पाम, लिली, स्पाइडर प्लांट और एलोवेरा हवा को शुद्ध करते हैं।

नासा के रिसर्च का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एक कमरे में चार बड़े एरिका पाम रखने से भरपूर मात्रा में नेचुरल ऑक्सीजन मिलती है। पौधों में कीड़े लगने पर उन्होंने एक लीटर पानी में एक चम्मच डिटरजेंट और एक चम्मच इस्तेमाल किया हुआ सड़ा तेल मिलाकर छिड़कने का अनोखा घरेलू उपाय भी बताया।

विश्व पर्यावरण दिवस पर देशवासियों को एक कड़ा संदेश देते हुए राधिका ने सिंगल यूज प्लास्टिक को तुरंत छोड़ने की अपील की। उन्होंने भावुक होकर कहा कि इंसान किसी भी मजहब का हो, अंतिम यात्रा में लकड़ी ही काम आती है। इसलिए धरती मां के लिए एक पेड़ जरूर लगाएं।

Author: Sachin Kulkarni

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