Pm Modi के संबोधन पर भड़के देश के 700 दिग्गज, चुनाव आयोग से की सख्त शिकायत

Complaint Against Pm Modi: प्रधानमंत्री के 18 अप्रैल वाले ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ पर भारी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। देश के 700 से अधिक प्रतिष्ठित नागरिकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कड़ा पत्र लिखा है। इन लोगों में पूर्व नौकरशाह, वरिष्ठ पत्रकार और शिक्षाविद शामिल हैं। इन्होंने प्रधानमंत्री पर आदर्श आचार संहिता के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया है। इनका स्पष्ट कहना है कि सरकारी मंचों का इस्तेमाल चुनाव में राजनीतिक फायदा लेने के लिए किया गया है।

सरकारी माध्यमों पर राजनीतिक भाषण का आरोप

यह विवाद 18 अप्रैल रात प्रसारित हुए प्रधानमंत्री के भाषण से जुड़ा है। इसमें उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष को जमकर घेरा था। उन्होंने कांग्रेस, टीएमसी और सपा जैसी पार्टियों की कड़ी आलोचना की थी। पीएम ने महिलाओं से विपक्ष से माफी मांगने की अपील की थी। शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि सरकारी माध्यमों पर ऐसा राजनीतिक भाषण देना गलत है। दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो का ऐसा इस्तेमाल चुनाव नियमों के खिलाफ है।

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बीच विवाद

यह संबोधन ऐसे समय हुआ है जब देश के कई राज्यों में चुनाव चल रहे हैं। असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदान प्रक्रिया जारी है। इन सभी चुनावी राज्यों के नतीजे 4 मई को आने वाले हैं। चुनाव आचार संहिता के नियम इस दौरान बहुत साफ होते हैं। चुनाव के समय मंत्री राजनीतिक प्रचार के लिए आधिकारिक पद का इस्तेमाल नहीं कर सकता है। सरकारी संसाधनों का राजनीतिक लाभ लेना पूरी तरह वर्जित है।

विपक्षी दलों को भी मिले बराबर का मौका

मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजे गए पत्र में मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। नागरिकों ने कहा है कि इस भाषण को सभी प्लेटफॉर्म्स से तुरंत हटाया जाए। इसके साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। शिकायत में एक और बहुत बड़ी मांग रखी गई है। नागरिकों ने कहा कि चुनाव आयोग ने पीएम को अनुमति दी थी। तो विपक्ष को भी सरकारी मीडिया पर अपनी बात रखने का समय मिलना चाहिए।

शिकायत करने वालों में कई बड़े नाम शामिल

चुनाव आयोग से शिकायत करने वालों में देश के कई जाने-माने लोग शामिल हैं। सूची में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग और अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर का नाम है। इनके अलावा योगेंद्र यादव, हर्ष मंदर और अंजलि भारद्वाज जैसे 700 दिग्गजों ने हस्ताक्षर किए हैं। पूर्व राजदूत मधु भादुड़ी और वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ने भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इन सभी लोगों ने इस घटना को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा बताया है।

राजनीतिक गलियारों में मचा भारी घमासान

इस अहम मुद्दे पर राजनीतिक गलियारों में भी भारी भूचाल आ गया है। सीपीआई के राज्यसभा सांसद पी. संदोष कुमार ने अलग से सख्त शिकायत दर्ज कराई है। टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा और आरजेडी नेता मनोज झा ने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोला है। बीजेपी ने भी बंगाल चुनावों के संदर्भ में विपक्ष पर पलटवार करते हुए शिकायतें दर्ज कराई हैं। अब पूरे देश की नजरें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।

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