पीएसी रिपोर्ट में दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, आप सरकार के कार्यकाल में बजट लैप्स और डॉक्टरों की भारी कमी का आरोप

New Delhi News: दिल्ली विधानसभा में पेश लोक लेखा समिति की रिपोर्ट ने राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर खामियों को उजागर किया है। यह रिपोर्ट वर्ष 2016 से 2022 के ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ पर आधारित है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि फंड होने पर भी तत्कालीन आप सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य परियोजनाएं पूरी नहीं की गईं। आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं किया गया और कई मामलों में बजट लैप्स हो गया। पीएसी अध्यक्ष अजय महावर ने यह रिपोर्ट विधानसभा पटल पर रखी है।

बजट का अधूरा उपयोग और प्रशासनिक लापरवाही

रिपोर्ट केअनुसार, आप सरकार के दौरान बजट के अधूरे उपयोग, प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर निगरानी के कारण दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता प्रभावित हुई। वह अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी। पीएसी ने खाली पदों को भरने और लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग को 31 जुलाई तक ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ देनी होगी। रिपोर्ट में साफ किया गया है कि प्रशासनिक स्तर पर कई कमियां रहीं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं।

ईडब्ल्यूएस योजना में कमजोर निगरानी

रिपोर्ट मेंबताया गया है कि निजी अस्पतालों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मुफ्त उपचार कराने में निगरानी कमजोर पाई गई। इसके अलावा झोलाछाप डॉक्टरों और नकली दवाओं पर नियंत्रण के लिए बने तंत्र भी इस दौरान प्रभावी नहीं रहे। सामने आया कि अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी रही। दवाओं और मेडिकल उपकरणों की उपलब्धता भी पर्याप्त नहीं थी, जिससे मरीजों को उपचार में परेशानी उठानी पड़ी। रिपोर्ट के अनुसार, खराब बेड-पेशेंट अनुपात के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा।

अस्पताल निर्माण में देरी और केंद्रीय योजनाओं का कमजोर क्रियान्वयन

रिपोर्ट मेंबताया गया कि जमीन उपलब्ध होने के बावजूद नए अस्पतालों के निर्माण में देरी हुई। परफॉर्मेंस ऑडिट में यह भी पाया गया कि आयुष्मान भारत योजना, जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी केंद्रीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ। पीएसी ने स्वास्थ्य विभाग को इन खामियों को दूर करने और सभी लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। विभाग को जुलाई के अंत तक अपनी कार्रवाई रिपोर्ट सौंपनी है। रिपोर्ट में पूर्ववर्ती सरकार के स्वास्थ्य प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

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