मुरादाबाद: MDA की 700 करोड़ की संपत्तियां 15 साल से ‘बेघर’, अब प्राइवेट कंपनियां बेचेंगी आपके सपनों का आशियाना

Moradabad News: मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) अपनी करीब 700 करोड़ रुपये की आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों को बेचने में पिछले 15 वर्षों से नाकाम रहा है। खराब लोकेशन, प्राइवेट बिल्डरों से मिल रही कड़ी चुनौती और जर्जर रखरखाव के कारण अलकनंदा और अरावली एन्क्लेव जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं ग्राहकों की बाट जोह रही हैं। अब इस गतिरोध को तोड़ने के लिए एमडीए ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्राधिकरण इन संपत्तियों की बिक्री के लिए अब निजी मार्केटिंग कंपनियों का सहारा लेने जा रहा है, जिसके लिए चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

उपेक्षा और बदहाली ने छीनी संपत्तियों की चमक

जिन योजनाओं को मध्यम और निम्न आय वर्ग के सपनों को पूरा करने के लिए बनाया गया था, वे आज प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हैं। 15 साल पुरानी आवासीय इकाइयों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि छतें कमजोर हैं और दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं। फर्श धंसने और रंगाई-पुताई उखड़ने के कारण ग्राहक इन्हें खरीदने से कतरा रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं जैसे पेयजल, सफाई और बिजली की बदहाल व्यवस्था ने एमडीए की ‘पहले आओ, पहले पाओ’ और 25 प्रतिशत तक की छूट वाली योजनाओं को भी पूरी तरह विफल कर दिया है।

कैसे काम करेगी निजी मार्केटिंग कंपनी?

एमडीए द्वारा नियुक्त की जाने वाली निजी कंपनी का मुख्य कार्य केवल मार्केटिंग और ग्राहकों तक पहुंच बनाना होगा। संपत्ति का पूर्ण स्वामित्व और आवंटन का अधिकार एमडीए के पास ही सुरक्षित रहेगा। कंपनी डिजिटल प्रचार, साइट विजिट और बुकिंग प्रक्रिया में सहयोग करेगी। इसके बदले में कंपनी को तय शर्तों के अनुसार लाभांश या कमीशन दिया जाएगा। जून तक इस चयन प्रक्रिया के पूरे होने की उम्मीद है, जिससे रुकी हुई संपत्तियों की बिक्री में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

बिक्री से पहले होगा संपत्तियों का ‘कायाकल्प’

मार्केटिंग कंपनी के मैदान में उतरने से पहले एमडीए ने अपनी जर्जर संपत्तियों को सुधारने की योजना बनाई है। इसके तहत फ्लैटों की मरम्मत, डेंटिंग-पेंटिंग और बिजली-पानी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। एमडीए अधिकारियों का मानना है कि जब संपत्तियां रहने लायक स्थिति में होंगी, तभी आधुनिक मार्केटिंग रणनीतियां प्रभावी साबित होंगी। प्राधिकरण केवल उन्हीं कंपनियों को मौका देगा जो एमडीए के हितों और शर्तों पर पूरी तरह खरी उतरेंगी।

क्यों फ्लॉप रहीं एमडीए की ये योजनाएं?

एमडीए की संपत्तियों के न बिकने के पीछे कई प्रमुख कारण सामने आए हैं। इनमें मुख्य मार्गों से खराब कनेक्टिविटी, शहर के मुख्य बाजारों से दूरी और सार्वजनिक परिवहन की अनुपलब्धता सबसे बड़ी बाधा है। साथ ही, प्राइवेट बिल्डरों द्वारा दी जा रही लग्जरी सुविधाओं के सामने एमडीए की साधारण परियोजनाएं टिक नहीं सकीं। ग्राहक आज ऐसे तैयार घर चाहते हैं जहां बुनियादी सुविधाएं पहले से मौजूद हों, जबकि मेंटेनेंस के अभाव को देखकर लोग निवेश करने से पीछे हट जाते हैं।

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