इलाज होगा सस्ता! सिरिंज और हार्ट वॉल्व की कीमतों में भारी कटौती की तैयारी, सरकार से बड़ी मांग

New Delhi News: मेडिकल उपकरणों की आसमान छूती कीमतों को कम करने के लिए देश के प्रमुख एसोसिएशन ने सरकार से गुहार लगाई है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री ने मांग की है कि मेडिकल उपकरणों के खुदरा दाम तार्किक बनाए जाएं। इससे मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा। वर्तमान में फैक्टरी मूल्य और एमआरपी के बीच भारी अंतर पाया गया है। सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिससे हेल्थ इंश्योरेंस भी सस्ता हो सकता है।

3 रुपये की सिरिंज 30 में और 4 लाख का वॉल्व 26 लाख में

एसोसिएशन ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए बताया कि एक सिरिंज की फैक्टरी कीमत मात्र 3 रुपये है। लेकिन बाजार में इसे मरीजों को 30 रुपये की भारी कीमत पर बेचा जाता है। इसी तरह 6 रुपये का कैनुला 120 रुपये में बिक रहा है। सबसे डरावना अंतर हार्ट वॉल्व और पेसमेकर की कीमतों में है। 4 लाख रुपये के हार्ट वॉल्व की कीमत अस्पताल में 26 लाख रुपये तक वसूली जाती है। इन दामों को घटाकर 8 लाख रुपये करने का सुझाव दिया गया है।

पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती उत्पादन लागत की चुनौतियां

हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित फार्मा संगठनों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट ने दवाओं की लागत बढ़ा दी है। कच्चे माल और पेट्रोलियम आधारित पैकेजिंग सामग्री के दाम 35-40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि खुदरा कीमतों में पर्याप्त मार्जिन होने के कारण ग्राहकों पर बोझ नहीं पड़ना चाहिए। एक्टिव फार्मास्युटिकल्स इंग्रिडिएंट्स (API) की कमी से गुजरात और महाराष्ट्र की कंपनियां चिंतित हैं। उन्होंने नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) से कीमतों में संशोधन की मांग की है।

स्वदेशी उत्पादों को मिलेगा बाजार में बड़ा फायदा

मेडिकल उपकरणों के दाम कम होने से न केवल मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि स्वदेशी निर्माताओं को भी लाभ होगा। कीमतें तार्किक होने से भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। एसोसिएशन के संयोजक राजीव नाथ ने बताया कि एनपीपीए इस मुद्दे पर सकारात्मक रुख अपनाए हुए है। अस्पतालों के बिल कम होने से आम आदमी की पहुंच बेहतर इलाज तक आसान होगी। साथ ही बीमा कंपनियों के क्लेम की लागत घटने से प्रीमियम दरों में भी कमी आने की संभावना है।

दवाओं और उपकरणों की एमआरपी पर नियंत्रण की कवायद

फार्मा एक्सपर्ट सतीश सिंघल के अनुसार, खुदरा दुकानदार अभी भी बड़े मार्जिन पर काम कर रहे हैं। अगर फैक्टरी से दवाओं की खरीद 40 प्रतिशत महंगी भी होती है, तो भी दुकानदार का मुनाफा प्रभावित नहीं होगा। सरकार अब इस बात पर ध्यान दे रही है कि सप्लाई चेन के बीच का मुनाफा कम कर सीधे जनता को लाभ मिले। आने वाले दिनों में एनपीपीए मेडिकल डिवाइस और जीवन रक्षक दवाओं की नई प्राइस लिस्ट जारी कर सकता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे में बड़ा सुधार होगा।

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