डॉक्टर की लापरवाही ने दांव पर लगाई जान: ऑपरेशन के बाद गर्भवती के पेट में छोड़ी रुई, अस्पताल सील

Bahraich News: उत्तर प्रदेश के बहराइच में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मेडी-वे अस्पताल को सील कर दिया है। मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) कार्यालय के करीब स्थित इस निजी अस्पताल में एक गर्भवती महिला के ऑपरेशन के दौरान घोर लापरवाही का मामला सामने आया था। जांच में पुष्टि हुई है कि ऑपरेशन के बाद महिला के पेट में सर्जिकल रुई पट्टी (गाज) छोड़ दी गई थी। इस मामले में राजकीय मेडिकल कॉलेज की एक महिला सर्जन और संबंधित चिकित्साधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।

पांच सितंबर को हुआ था प्रसव का ऑपरेशन

पीड़ित पति अजय तिवारी के अनुसार, उन्होंने अपनी गर्भवती पत्नी अंजू देवी को 5 सितंबर 2025 को मेडी-वे हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। वहां ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराया गया और एक स्वस्थ बच्ची का जन्म हुआ। हालांकि, डिस्चार्ज होने के कुछ दिनों बाद ही अंजू की तबीयत बिगड़ने लगी। दोबारा अस्पताल दिखाने पर डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराया और दवाएं दीं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। हालत गंभीर होने पर अस्पताल ने मरीज को रेफर कर अपना पल्ला झाड़ लिया।

छह लाख का खर्च और आंतों में सड़न

जब मरीज को बहराइच के दूसरे अस्पताल में दिखाया गया, तो वहां की जांच रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया। महिला के पेट में सर्जिकल स्पंज फंसा हुआ था, जिसकी वजह से उसकी आंतों में सड़न पैदा हो गई थी। मरीज की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को आनन-फानन में बाईपास सर्जरी करनी पड़ी। इस पूरी प्रक्रिया और इलाज में पीड़ित परिवार के करीब छह लाख रुपये खर्च हो गए। अस्पताल की इस लापरवाही ने न केवल आर्थिक बल्कि शारीरिक और मानसिक पीड़ा भी दी।

जांच कमेटी की रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई

सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। एसीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने पीड़ित परिवार, अस्पताल संचालक और संबंधित डॉक्टरों के बयान दर्ज किए। जांच रिपोर्ट में लापरवाही की पुष्टि होने के बाद शनिवार को अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की गई। जांच में यह भी सामने आया कि ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज की एक महिला सर्जन ने किया था, जो नियमों के विरुद्ध निजी अस्पताल में सेवाएं दे रही थीं।

दोषी डॉक्टरों पर विधिक कार्रवाई की तैयारी

सीएमओ ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है और संबंधित महिला सर्जन व चिकित्साधिकारी के विरुद्ध कड़ी विधिक कार्रवाई की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की इस सख्त कार्रवाई से जिले के अन्य निजी अस्पतालों में हड़कंप मच गया है। पीड़ित परिवार अब न्याय और मुआवजे की मांग कर रहा है ताकि उनकी आर्थिक क्षति की भरपाई हो सके और दोषियों को सजा मिले।

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