ईरान युद्ध का भारत पर सीधा असर: ईंधन संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, अचानक बदल गए केरोसिन के नियम

New Delhi News: मध्य पूर्व में भड़के युद्ध की आंच अब भारत के गांवों तक पहुंच गई है। कच्चे तेल के गहरे संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक बेहद बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने मिट्टी के तेल (केरोसिन) की सप्लाई और वितरण के नियमों में अचानक बड़ी छूट दे दी है। सरकार का यह फैसला करोड़ों ग्रामीण परिवारों पर सीधा असर डालेगा। यह नई आपातकालीन नीति इसलिए लागू की गई है ताकि गांवों में ईंधन की कोई किल्लत न हो।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने नियमों में क्या दी ढील?

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। इसे देखते हुए भारत सरकार ने ग्रामीण भारत को ऊर्जा संकट से बचाने की पूरी तैयारी कर ली है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने केरोसिन आपूर्ति को लेकर कई अहम बदलाव किए हैं:

  • राशन कार्ड धारकों को अब तय कोटे से अधिक मिट्टी का तेल मिल सकेगा।
  • सभी राज्यों को केरोसिन का अतिरिक्त आपातकालीन स्टॉक रखने की विशेष मंजूरी दी गई है।
  • ग्रामीण वितरण प्रणाली को अब पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है।
  • पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में सप्लाई के लिए विशेष ट्रांसपोर्ट व्यवस्था लागू होगी।

ईरान युद्ध से कैसे गहराया ऊर्जा संकट

दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई चेन इस समय बुरी तरह टूट चुकी है। खाड़ी देशों से आने वाले तेल के जहाजों पर लगातार हमले का खतरा मंडरा रहा है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल इन्हीं खाड़ी देशों से खरीदता है। ऐसे में देश के भीतर पेट्रोल और गैस की संभावित कमी को देखते हुए केरोसिन को तैयार रखा जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि ईंधन की कमी से खेती और किसानी का काम बिल्कुल न रुके।

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