National News: अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक तेल बाजार में एक बड़ी हलचल तेज हो गई है। भारत करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद ईरान से कच्चा तेल खरीदने जा रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह किए बिना ईरान का एक विशाल तेल टैंकर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस बड़े कदम से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में गिरावट की उम्मीद बंध गई है। मिडिल ईस्ट में मचे भारी बवाल के बीच भारत का यह कदम आम जनता के लिए बड़ी राहत ला सकता है।
वडीनार बंदरगाह की ओर बढ़ रहा ईरानी टैंकर
शिप-ट्रैकिंग डेटा से एक बेहद अहम जानकारी निकलकर सामने आई है। ‘पिंग शुन’ नाम का एक बड़ा अफ्रामैक्स टैंकर इस हफ्ते भारत पहुंच सकता है। यह जहाज भारत के पश्चिमी तट पर मौजूद गुजरात के वडीनार बंदरगाह की तरफ आ रहा है। यह टैंकर मार्च की शुरुआत में ईरान के खर्ग द्वीप से कच्चा तेल लेकर चला था। हालांकि, इसका आखिरी ठिकाना क्या होगा, इसे लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।
मई 2019 के बाद पहली बार आ रहा तेल
अगर यह तेल भारत के बंदरगाह पर उतर जाता है, तो यह मई 2019 के बाद पहली बड़ी डिलीवरी होगी। आपको याद होगा कि उस वक्त अमेरिका ने ईरान पर बहुत कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। अमेरिकी दबाव के कारण भारत समेत दुनिया के कई देशों ने ईरान से तेल मंगाना बंद कर दिया था। अब सात साल बाद यह कूटनीतिक बर्फ पिघलती हुई दिख रही है।
मिडिल ईस्ट के तनाव में संजीवनी बनेगा यह तेल!
इस समय पूरा मिडिल ईस्ट भारी तनाव के दौर से गुजर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया भर में होने वाली तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वैश्विक संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ गई है। ऐसे मुश्किल वक्त में ईरानी तेल की बाजार में वापसी एक बहुत बड़ी राहत है।
पेमेंट और इंश्योरेंस का पेंच अभी भी फंसा है
तेल आ तो रहा है, लेकिन यह सौदा इतना भी आसान नहीं है। इस डील के रास्ते में अभी भी कई बड़ी आर्थिक चुनौतियां खड़ी हैं। पेमेंट, शिपिंग और इंश्योरेंस से जुड़े कई पेंच फंसे हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बैंक ईरान से जुड़े किसी भी लेनदेन में शामिल होने से बच रहे हैं। वे डॉलर में भुगतान करने से कतराते हैं।
मैंगलोर में फंसी है एलपीजी की खेप
भुगतान की दिक्कत का एक ताजा उदाहरण हाल ही में देखने को मिला है। ईरान से एलपीजी की एक खेप भारत तो आ गई थी, लेकिन पेमेंट अटकने के कारण उसे उतारा नहीं जा सका। ‘सी बर्ड’ नाम का यह जहाज मैंगलोर पहुंच चुका है। भुगतान न होने के कारण माल की डिलीवरी अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।
रिफाइनरी कंपनियों ने साधी गहरी चुप्पी
इस पूरे कूटनीतिक और व्यापारिक मामले पर भारत की बड़ी रिफाइनरी कंपनियों ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली है। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और नायरा एनर्जी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बताया जा रहा है कि नायरा एनर्जी का प्लांट इस महीने रखरखाव के चलते बंद रहेगा। ऐसे में उसे फिलहाल कच्चे तेल की ज्यादा जरूरत नहीं है।


