Business News: बुधवार, 20 मई 2026 को भारतीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जून डिलीवरी वाला क्रूड ऑयल 47 रुपये की बढ़त के साथ 10,074 रुपये प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। घरेलू बाजार में यह उछाल मुख्य रूप से हाजिर मांग (स्पॉट डिमांड) में मजबूती के कारण आया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव
घरेलू बाजार के उलट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुख है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.31 प्रतिशत गिरकर 110.81 डॉलर प्रति बैरल पर है, जबकि ब्रेंट क्रूड में 0.42 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है और यह 106.98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
क्यों नरम हुए वैश्विक दाम?
वैश्विक स्तर पर कीमतों में गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक प्रगति को माना जा रहा है। हालिया बयानों के अनुसार, ईरान के साथ तनाव कम होने की उम्मीदों ने निवेशकों में सावधानी बढ़ा दी है। इसके बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण बाजार अभी भी बेहद सतर्क बना हुआ है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर
ऊंची तेल कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। भारत रेटिंग्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति में बाधा और तेल की उच्च कीमतों के चलते वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ धीमी होकर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। सरकार ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कच्चे तेल की चाल अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर निर्भर करेगी। यदि कूटनीतिक स्तर पर राहत मिलती है, तो कीमतें और गिर सकती हैं। वहीं, किसी भी तरह का भू-राजनीतिक तनाव दोबारा कीमतों में आग लगा सकता है। ट्रेडर्स को बाजार के मौजूदा उतार-चढ़ाव को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
Author: Rajesh Kumar

