हिमाचल का दूध अब बाहर नहीं जाएगा! सुक्खू सरकार 26 रुपये का घाटा सहकर कर रही है कौन सा बड़ा खेल?

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में अब किसानों का दूध औने-पौने दामों पर दूसरे राज्यों में नहीं बिकेगा। सुक्खू सरकार अगले एक साल में राज्य का पूरा दूध हिमाचल में ही खपाने की बड़ी तैयारी कर रही है। कांगड़ा के ढगवार में बन रहा नया आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट इस दिशा में गेमचेंजर साबित होगा। फिलहाल सरकार किसानों को बचाने के लिए 26 रुपये प्रति लीटर का भारी घाटा सह रही है। अक्टूबर तक नया प्लांट शुरू होते ही यह पुरानी तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई ताकत मिलेगी।

26 रुपये के भारी घाटे का क्या है पूरा सच?

विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक हैरान करने वाली जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों को नुकसान से बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। सरकार प्रति लीटर करीब 26 रुपये का भारी घाटा सहकर दूध बाहर भेज रही है। अभी हिमाचल का दूध अमूल जैसी संस्थाओं को बेचा जाता है। ये संस्थाएं दूध से फैट निकालकर उसे वापस हिमाचल में ही बेच देती हैं। अब सुक्खू सरकार इस व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने जा रही है। भविष्य में दूध का पाउडर नहीं बनेगा। इसके बजाय शुद्ध घी तैयार कर राज्य के लोगों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा।

ढगवार में बन रहा है विश्वस्तरीय अत्याधुनिक प्लांट

कांगड़ा जिले के ढगवार में एक विशाल और आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट बन रहा है। इस प्लांट में दुनिया की सबसे बेहतरीन और विश्वस्तरीय मशीनें लगाई जा रही हैं। इसका पूरा संचालन नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) करेगा। इस प्लांट की क्षमता हर दिन 1.50 लाख लीटर दूध प्रोसेस करने की होगी। सरकार ने इस साल अक्टूबर तक इसे शुरू करने का लक्ष्य रखा है। यहां दूध के साथ-साथ शुद्ध घी, ताजी लस्सी और पनीर जैसे कई डेयरी उत्पाद बनेंगे। किसानों की आय का यह एक बेहद मजबूत और टिकाऊ स्रोत बनेगा।

हमीरपुर, ऊना और कुल्लू में भी खुलेंगे नए प्लांट

पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने बताया कि हिमाचल में दूध का उत्पादन अब काफी बढ़ गया है। मौजूदा प्लांटों की क्षमता कम पड़ रही है और पूरा दूध प्रोसेस नहीं हो पा रहा है। इसी मजबूरी में अतिरिक्त दूध अमूल और मदर डेयरी को बेचना पड़ रहा है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार तेजी से काम कर रही है। जल्द ही हमीरपुर और ऊना में नए मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएंगे। इसके अलावा कुल्लू जिले में भी एक नया प्लांट स्थापित होगा। कुल्लू के प्लांट के लिए जायका (JICA) से वित्तीय मदद मिल चुकी है। दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बल्क मिल्क चिलिंग व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी।

विधायकों ने उठाई नए चिलिंग सेंटर बनाने की मांग

विधानसभा में विधायकों ने दूध उत्पादन से जुड़ी जमीनी समस्याएं भी प्रमुखता से उठाईं। धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर ने अपने क्षेत्र को ढगवार प्लांट से जोड़ने की पुरजोर मांग की। उन्होंने डेयरी क्षेत्र में निजी निवेश को भी बढ़ावा देने का अहम सुझाव दिया। विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि दूध का कलेक्शन तो बढ़ा है, लेकिन प्रोसेसिंग नहीं हो पा रही है। उन्होंने किसानों की परेशानी दूर करने के लिए नए चिलिंग सेंटर खोलने की बात कही। विधायक लोकेंद्र कुमार ने दत्तनगर क्षेत्र का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि वहां रोजाना एक लाख लीटर दूध पैदा होता है। इस दूध को सुरक्षित ढगवार प्लांट तक पहुंचाने की ठोस व्यवस्था तुरंत होनी चाहिए।

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