Himachal News: हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में इस बार इतिहास रचा जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग करवाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रदेश के इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब मतगणना प्रक्रिया पूरी तरह कैमरों की सख्त निगरानी में संपन्न होगी। आयोग ने इसके लिए राज्यभर में स्थापित करीब 3890 मतगणना केंद्रों पर पुख्ता इंतजाम करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
3890 केंद्रों पर तैनात होंगे वीडियोग्राफर
निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष चुनाव के लिए जिला उपायुक्तों को वीडियोग्राफरों और फोटोग्राफरों की सेवाएं लेने के आदेश दिए हैं। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य मतगणना के दौरान किसी भी संभावित विवाद को रोकना और पुख्ता साक्ष्य सुरक्षित रखना है। सचिव सुरजीत सिंह राठौर ने स्पष्ट किया कि इस पहल से न केवल चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि अनियमितताओं की आशंका भी न्यूनतम हो जाएगी। सुरक्षा और पारदर्शिता के मानक तय करने के लिए जिलों को विस्तृत कार्ययोजना भेज दी गई है।
31 मई को होगा चुनावी नतीजों का फैसला
राज्य की 53 शहरी निकायों और त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के लिए मतदान प्रक्रिया जारी है। धर्मशाला, पालमपुर, सोलन और मंडी जैसे चार प्रमुख नगर निगमों में ईवीएम के जरिए वोट डाले जाएंगे। इन चारों निगमों के नतीजे 31 मई को सुबह 9 बजे से शुरू होने वाली मतगणना के बाद स्पष्ट होंगे। वहीं, 49 नगर परिषदों और नगर पंचायतों में मतदान के तुरंत बाद स्थानीय मुख्यालयों पर गिनती शुरू कर दी जाएगी। इस पूरी कवायद में तकनीक का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है।
पंचायती राज संस्थाओं के लिए विस्तृत योजना
प्रदेश की 3754 ग्राम पंचायतों, 92 पंचायत समितियों और 12 जिला परिषदों के 31,182 पदों पर चुनाव हो रहे हैं। इनमें से कई सीटों पर निर्विरोध चुनाव की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। ग्राम पंचायतों में वार्ड सदस्य, उपप्रधान और प्रधान पद के नतीजे मतदान के तुरंत बाद पंचायत स्तर पर ही घोषित होंगे। हालांकि, जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 31 मई को सुबह 9 बजे से 92 विकास खंड मुख्यालयों पर आधिकारिक मतगणना की जाएगी।
प्रशासनिक तैयारी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
चुनाव आयोग ने नामांकन प्रक्रिया से लेकर प्रमाण पत्र वितरण तक के लिए सुव्यवस्थित तंत्र विकसित किया है। मतगणना केंद्रों पर बाहरी हस्तक्षेप रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। वीडियो रिकॉर्डिंग के फुटेज को एक निश्चित अवधि तक सुरक्षित रखा जाएगा ताकि भविष्य में कानूनी चुनौतियों का सामना किया जा सके। सरकार और आयोग का मानना है कि इस डिजिटल निगरानी से मतदाताओं का लोकतांत्रिक प्रणाली पर भरोसा और अधिक मजबूत होगा।
हिमाचल में चुनावी उत्सव और तकनीकी प्रयोग
हिमाचल प्रदेश अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद चुनावी तकनीक को अपनाने में अग्रणी रहा है। इस बार वीडियोग्राफी का प्रयोग यह दर्शाता है कि प्रशासन किसी भी कीमत पर धांधली की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता। जनता के बीच भी इस फैसले को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। 31 मई की तारीख राज्य की स्थानीय राजनीति के लिए निर्णायक साबित होगी। तब तक सभी जिलों में वीडियोग्राफी टीमों का गठन और तकनीकी ट्रायल पूरे कर लिए जाएंगे।


