बजट के बहाने हिमाचल विधानसभा में ‘महाभारत’, 10 हजार करोड़ के घाटे और ‘आम आदमी’ सीएम पर उठे तीखे सवाल

Himachal News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकार के मंत्रियों ने इस बजट को सीमित संसाधनों के बावजूद 70 लाख लोगों के हित का दस्तावेज बताया। वहीं, विपक्ष ने इसे महज भ्रम और कोरी घोषणाओं का पुलिंदा करार दिया है। सदन में आरडीजी (RDG) में कटौती से लेकर आपदा राहत और खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवाओं तक के मुद्दे पर जमकर जुबानी तीर चले।

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सदन में सरकार का मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल कांग्रेस पार्टी का नहीं, बल्कि प्रदेश की 70 लाख जनता का बजट है। सरकार ने बेहद विपरीत परिस्थितियों में इसे पेश किया है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह ने हमेशा हिमाचल की खुलकर मदद की थी। कांग्रेस राजनीति से ऊपर उठकर जनता को आगे ले जाने में विश्वास रखती है।

बजट में कटौती, लेकिन नहीं छिनेगा किसी का हक

मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि बजट के आकार में 3500 से 4000 करोड़ रुपये की भारी कटौती करनी पड़ी है। प्रदेश को सालाना करीब 10 हजार करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान हो रहा है। ऐसे में सीमित संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि बजट का आकार बेशक छोटा हुआ है, लेकिन हमने अपना जमीर और बड़ा कर लिया है। किसी भी व्यक्ति का हक बिल्कुल नहीं छीना जाएगा।

कांग्रेस विधायक भवानी सिंह पठानिया ने भी भाजपा पर सीधा और तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आरडीजी को लेकर भाजपा लगातार भ्रामक प्रचार कर रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा की असली तकलीफ यह है कि एक सामान्य परिवार का व्यक्ति प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसे बन गया। पूर्व भाजपा सरकार को केंद्र से 70 हजार करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन उन्होंने उस भारी भरकम फंड का क्या किया?

पठानिया ने स्वास्थ्य सेवाओं का जिक्र करते हुए विपक्ष के सभी दावों को खारिज कर दिया। प्रदेश के अस्पतालों में अब आधुनिक रोबोटिक सर्जरी शुरू हो चुकी है। सरकार लगातार खाली पदों पर भर्तियां कर रही है। उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि वे बताएं कि सरकार ने किसे नौकरी से निकाला है। साल 2022 में हिमाचल नेशनल रैंकिंग में 21वें स्थान पर था। आज प्रदेश पांचवें स्थान पर आ चुका है।

विपक्ष का पलटवार: आपदा के पीड़ितों को नहीं मिला पैसा

विपक्ष की ओर से विधायक इंदर दत्त लखनपाल ने इस बजट को केवल भ्रम फैलाने वाला दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि 2023 की भयंकर आपदा के पीड़ितों को आज तक राहत राशि नहीं मिली है। उनके अपने विधानसभा क्षेत्र में 970 बीपीएल परिवार थे। सरकार की हालिया छंटनी के बाद अब केवल 119 परिवार ही इस सूची में बचे हैं। सरकार केवल ऐसी योजनाएं बना रही है, जिनका जमीनी स्तर पर कोई वजूद नहीं है।

लखनपाल ने टोल टैक्स और खस्ताहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सरकार को घेरा। बिलासपुर, चंबा और कांगड़ा के हजारों लोग रोजगार के लिए बाहरी राज्यों में रहते हैं। टोल टैक्स में एंट्री फीस बढ़ाकर सरकार उन्हें ही परेशान कर रही है। उन्होंने विधायक निधि में कटौती का भी कड़ा विरोध किया। बड़सर क्षेत्र के 12 अस्पतालों में या तो एंबुलेंस नहीं हैं या फिर वे खराब पड़ी हैं। अस्पतालों में मशीनें हैं, लेकिन डॉक्टर गायब हैं।

बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी ने सरकार पर उनके क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया। आपदा के बाद से बंजार में आज भी 20 सड़कें पूरी तरह से बंद पड़ी हैं। सरकार ने उन्हें खोलने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि यह सरकार केवल कोरी घोषणाएं कर रही है। पुराने बजट की घोषणाओं को ही नए बजट में दोहराया जा रहा है।

किसानों और बागवानों के हित में है यह बजट

विधायक किशोरी लाल ने बजट का बचाव करते हुए इसे ग्रामीण और युवा हितैषी करार दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार राज्य पर 75 हजार करोड़ रुपये का भारी कर्ज छोड़कर गई थी। इसके बावजूद सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। भाजपा नेता केवल सियासी बयानबाजी करके जनता को गुमराह कर रहे हैं। भाजपा को राजनीति छोड़कर केंद्र से राज्य की आरडीजी बहाल करवानी चाहिए।

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