‘हमारा हक दो या सत्ता छोड़ो’… शिमला की सड़कों पर उतरे लाखों बुजुर्ग, सुक्खू सरकार की क्यों उड़ी नींद?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने सुक्खू सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। शिमला के चौड़ा मैदान में हजारों पेंशनरों ने विशाल धरना प्रदर्शन किया। इन बुजुर्गों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पेंशनरों का साफ कहना है कि सरकार उनकी लंबित वित्तीय देनदारियां तुरंत चुकाए। अगर सरकार ने उनका हक नहीं दिया, तो वे इस सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकेंगे।

तीन साल से पेंशनरों के साथ हो रहा है सौतेला व्यवहार

पेंशनरों का आरोप है कि राज्य सरकार उनके साथ पिछले तीन साल से सौतेला व्यवहार कर रही है। एक जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच रिटायर हुए कर्मचारियों को भारी नुकसान हो रहा है। इन बुजुर्गों को अभी तक ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट का पैसा नहीं मिला है। 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) का भुगतान भी अटका हुआ है। इसके अलावा 44 महीने की बकाया राशि भी सरकार ने अभी तक नहीं दी है।

करोड़ों के चिकित्सा बिल पेंडिंग, बुजुर्गों में भारी आक्रोश

बुढ़ापे में दवाइयों का खर्च सबसे ज्यादा होता है। लेकिन पिछले तीन सालों से करोड़ों रुपये के चिकित्सा बिलों का भुगतान नहीं हुआ है। इससे पेंशनर्स भारी आर्थिक तंगी और मानसिक परेशानी झेल रहे हैं। इसी वजह से पेंशनरों में सरकार के खिलाफ भारी रोष पनप रहा है। बुजुर्गों ने साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि समय रहते उनका हक नहीं मिला तो अंजाम बुरा होगा।

एक लाख करोड़ के भारी कर्ज में डूबा है हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश में कुल 1.5 लाख सरकारी पेंशनभोगी हैं। इन्हें सरकारी खजाने से सुपरएनुएशन और फैमिली पेंशन मिलती है। राज्य सरकार इस समय भयानक आर्थिक संकट से जूझ रही है। प्रदेश पर कर्ज का बोझ एक लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। हालात अब बहुत ज्यादा खराब हो चुके हैं। सरकार को कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए भी नया कर्ज लेना पड़ रहा है। हाल ही के बजट में भी सरकार ने लंबित देनदारियों का कोई जिक्र नहीं किया।

पिछली सरकार पर मढ़ा 11000 करोड़ की देनदारी का ठीकरा

सुक्खू सरकार अपनी सफाई में पुरानी सरकार को जिम्मेदार ठहराती है। सरकार का कहना है कि जयराम ठाकुर की सरकार उन पर 11000 करोड़ रुपये की देनदारियां छोड़ गई थी। यह आर्थिक बोझ और देनदारी का आंकड़ा अब लगातार बढ़ता जा रहा है। खर्चों को काबू करने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। बजट में नेताओं और बड़े अफसरों के वेतन को छह महीने के लिए रोक दिया गया है। सरकार के इस कड़े फैसले से अंदर ही अंदर भारी नाराजगी भी पनप रही है।

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