Railway News: देश भर में भारतीय रेल की लगभग 1,068 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण है, जो कुल 4.99 लाख हेक्टेयर भूमि का करीब 0.21 प्रतिशत है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेलवे की कुल भूमि में से लगभग 80 प्रतिशत पटरियों के पास और 5 प्रतिशत उसके आसपास है, जबकि शेष 15 प्रतिशत भूमि स्टेशनों, कॉलोनियों, अस्पतालों और अन्य विकास कार्यों के लिए उपयोग में लाई जाती है।
अतिक्रमणकारियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास देने का प्रयास
रेल मंत्रीने कहा कि रेलवे की भूमि पर झुग्गियां मुख्य रूप से गरीब लोगों द्वारा बसाई गई हैं। जहां संभव होता है, वहां राज्य सरकारों के साथ मिलकर व्यावहारिक समाधान निकाला जाता है। सूरत का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के सहयोग से अतिक्रमणकारियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास देने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए भूमि खाली कराई गई और विकास कार्य आगे बढ़ाए गए।
ड्रोन और सैटेलाइट से होगी निगरानी
रेलवेभूमि की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी कदम उठाए गए हैं। इनमें भूमि का पूर्ण डिजिटलीकरण और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को पोर्टल पर उपलब्ध कराना शामिल है। रेल मंत्री ने बताया कि प्रत्येक भूखंड का उचित मानचित्रण कर उसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से सुरक्षित किया गया है। ड्रोन और सैटेलाइट के माध्यम से सर्वेक्षण भी किया गया है, ताकि नए अतिक्रमण को रोका जा सके। इससे नए अतिक्रमण की पहचान कर तुरंत कार्रवाई संभव हो पाती है।
पिछले पांच वर्षों में 98 हेक्टेयर भूमि हुई अतिक्रमण मुक्त
रेल मंत्रीने बताया कि हाल के वर्षों में नए अतिक्रमण में कमी आई है और यह लगभग रुक गया है। पुराना अतिक्रमण मुख्य चुनौती बना हुआ है। पिछले पांच वर्षों में लगभग 98.02 हेक्टेयर रेलवे भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है। भूमि विकास पर उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष में इससे लगभग 900 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। रेल मंत्री ने कहा कि जहां-जहां राज्यों का सहयोग मिलता है, वहां बेहतर परिणाम सामने आते हैं। भूमि राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आती है और केंद्र उनके साथ मिलकर काम करता है। फिलहान रेलवे अतिक्रमण मुक्ति के लिए तकनीकी साधनों और राज्यों के सहयोग से लगातार प्रयास कर रहा है।


