चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर ‘वसूली सिंडिकेट’ का भंडाफोड़: पूर्व CEO और AGM पर CBI का शिकंजा, ऑडियो क्लिप से खुले राज

Chandigarh News: चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर टैक्सी यूनियन से जुड़े ‘उगाही सिंडिकेट’ का सनसनीखेज पर्दाफाश हुआ है। भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों में सीबीआई (CBI) ने एयरपोर्ट के पूर्व सीईओ राकेश रंजन सहाय और वर्तमान एजीएम (कमर्शियल) अमृत गर्ग के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने पद का दुरुपयोग कर टैक्सी ऑपरेटरों से मोटी रकम वसूली और एक खास सिंडिकेट को अवैध फायदा पहुंचाया।

भ्रष्टाचार के सबूतों वाली पेन ड्राइव ने बढ़ाई मुश्किलें

इस पूरे घोटाले का सच एक गोपनीय पेन ड्राइव के जरिए सामने आया है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर माया लावनिया ने नई दिल्ली मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के साथ भेजी गई पेन ड्राइव में कई ऐसी ऑडियो क्लिप मौजूद हैं, जिनमें रिश्वत के लेन-देन की स्पष्ट बातें हो रही हैं। इन सबूतों ने अधिकारियों के भ्रष्टाचार के दावों को पुख्ता कर दिया है।

विजिलेंस जांच में हुआ उगाही का खुलासा

ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद शुरुआती जांच विजिलेंस विभाग को सौंपी गई थी। विजिलेंस की पड़ताल में यह पाया गया कि एयरपोर्ट पर टैक्सी ऑपरेटरों से न केवल पैसे मांगे जाते थे, बल्कि उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित भी किया जाता था। जो ऑपरेटर पैसे देने से इनकार करते थे, उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था। इस जांच के बाद मामला केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के पास पहुंचा।

नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को फायदा

सीबीआई की FIR के मुताबिक, आरोपित अधिकारियों ने सरकारी नियमों को दरकिनार कर किसी विशेष टैक्सी ऑपरेटर को अनुचित लाभ पहुंचाया। इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ, बल्कि एयरपोर्ट पर निष्पक्ष व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा भी खत्म हो गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उगाही और ब्लैकमेलिंग के जरिए अधिकारियों ने करोड़ों रुपये का अवैध लाभ कमाया और सिस्टम को पूरी तरह प्रभावित किया।

सीवीसी की सिफारिश और मनी ट्रेल की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीवीसी ने 30 जनवरी 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि मामला आपराधिक प्रकृति का है, जिसमें ऑडियो की फॉरेंसिक जांच और ‘मनी ट्रेल’ (पैसे के लेन-देन का रास्ता) का पता लगाना अनिवार्य है। इसके बाद ही एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन की मंजूरी लेकर केस आधिकारिक रूप से सीबीआई की एंटी-करप्शन ब्रांच को सौंप दिया गया।

CBI खंगाल रही है अन्य अधिकारियों की भूमिका

सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस ‘उगाही सिंडिकेट’ में क्या कुछ अन्य उच्चाधिकारी भी शामिल थे। जांच एजेंसी इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि रिश्वत की यह मोटी रकम किन-किन खातों में घुमाई गई। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। फिलहाल, दोनों नामजद अधिकारियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

टैक्सी यूनियन में दहशत और राहत का माहौल

एयरपोर्ट टैक्सी यूनियन के सदस्यों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है। लंबे समय से शोषण का शिकार हो रहे चालकों का कहना है कि भ्रष्टाचार के कारण उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ गया था। सीबीआई की इस कार्रवाई से भ्रष्टाचार में लिप्त अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। जांच एजेंसी जल्द ही आरोपितों को पूछताछ के लिए तलब कर सकती है, जिससे इस सिंडिकेट की पूरी कड़ियां जुड़ सकेंगी।

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