ड्रोन से गिरते थे हथियार और नेपाल बॉर्डर से होती थी एंट्री: दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान से जुड़े बड़े आर्म्स सिंडिकेट का किया भंडाफोड़

Delhi News: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उत्तर भारत में सक्रिय एक बड़े अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इस खतरनाक नेटवर्क के तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े हुए पाए गए हैं। पुलिस ने दो सप्ताह तक चले सघन ऑपरेशन के दौरान कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 23 अत्याधुनिक विदेशी हथियार और 92 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। जांच में पता चला है कि इस सिंडिकेट को भगोड़ा शाहबाज अंसारी और उसका चाचा रेहान अंसारी विदेश से चला रहे हैं।

ड्रोन और नेपाल बॉर्डर के जरिए घुसपैठ

जांच में सुरक्षा एजेंसियों को चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। सिंडिकेट पाकिस्तान से हथियारों की खेप मंगवाने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन्स का इस्तेमाल करता था। ये हथियार ड्रोन के जरिए पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में गिराए जाते थे। इसके अलावा, हथियारों की तस्करी के लिए नेपाल सीमा के गुप्त रास्तों का भी प्रयोग किया जाता था। एक बार भारत में प्रवेश करने के बाद, इन हथियारों को दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सप्लाई किया जाता था।

एन्क्रिप्टेड ऐप्स से होती थी खतरनाक चैटिंग

अडिशनल सीपी पीएस कुशवाह के मुताबिक, यह गिरोह पकड़े जाने से बचने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करता था। सिंडिकेट के मुख्य हैंडलर शाहबाज अंसारी और रेहान अंसारी फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इनके खिलाफ पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस अब इनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच कर रही है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने लैपटॉप और मोबाइल के साथ हथियारों की मरम्मत करने वाले उपकरण भी जब्त किए हैं।

यूं शुरू हुआ गिरफ्तारियों का सिलसिला

गिरफ्तारियों का सिलसिला 14 अप्रैल को उस्मानपुर से शुरू हुआ, जब फरदीन नाम का आरोपी पिस्टल के साथ पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर शास्त्री पार्क से वसीक को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से दो शॉटगन मिलीं। इसके बाद 17 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच खुर्जा, लोनी, जौनपुर और आजमगढ़ से अन्य सहयोगियों को उठाया गया। जौनपुर से पकड़े गए अहमद के पास से अकेले 12 पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस मिले हैं। सिंडिकेट की हर कड़ी एक-दूसरे से जुड़ी हुई थी।

आर्थिक तंगी ने बनाया अपराधी

पुलिस पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क से जुड़े ज्यादातर आरोपी कम पढ़े-लिखे हैं। फरदीन जैसे युवाओं ने 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और आर्थिक तंगी के चलते अपराध की दुनिया में कदम रखा। ये सभी आरोपी वसीम मलिक जैसे पुराने अपराधियों के संपर्क में आकर इस सिंडिकेट का हिस्सा बने। गिरोह में काम का बंटवारा बिल्कुल साफ था। कोई बॉर्डर पर सक्रिय था तो कोई दिल्ली-एनसीआर में हथियारों की सप्लाई चेन को मैनेज करता था।

विदेशी हथियारों की यूपी में डिमांड

आजमगढ़ से गिरफ्तार विशाल ने कबूल किया है कि वह विशेष रूप से विदेशी पिस्टल की सप्लाई पूर्वी उत्तर प्रदेश में करता था। पूर्वी यूपी में इन अत्याधुनिक हथियारों की भारी मांग के कारण यह सिंडिकेट करोड़ों का मुनाफा कमा रहा था। पुलिस अब उन खरीदारों की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने इस सिंडिकेट से हथियार खरीदे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता की बात यह है कि ये हथियार गैंगवार और अन्य गंभीर अपराधों में इस्तेमाल किए जाने थे।

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