मनरेगा की जगह आज से लागू होगी ‘वीबी-जीरामजी’ योजना, अब मजदूरों को मिलेगी न्यूनतम 300 रुपये दिहाड़ी

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New Delhi News: देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार गारंटी को लेकर बुधवार से एक ऐतिहासिक और बेहद बड़ा बदलाव प्रभावी होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर अब ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी योजना (ग्रामीण)’ यानी ‘वीबी-जीरामजी’ को पूरे देश में लागू कर दिया है।

इस नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही सेंट्रल गवर्नमेंट ने ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार योजना की नई संशोधित मजदूरी दरें भी जारी कर दी हैं। नए नियमों के तहत अब देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दैनिक मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से कम बिल्कुल नहीं होगी।

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सरकार के इस बड़े फैसले का सबसे ज्यादा फायदा उन राज्यों के मजदूरों को मिलेगा, जहां अब तक दैनिक मजदूरी काफी कम थी। इन राज्यों में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, असम और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े सूबे शामिल हैं।

इन पिछड़े राज्यों की मजदूरी दरों में करीब 15 से 25 प्रतिशत तक की बंपर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नई अधिसूचना के जारी होने के बाद अब देश की औसत दैनिक मजदूरी करीब 299 रुपये से बढ़कर 327 रुपये से अधिक के स्तर पर पहुंच जाएगी।

इस बदलाव से देश स्तर पर मजदूरों को औसतन लगभग 28 रुपये प्रतिदिन का सीधा फायदा मिलेगा। राष्ट्रीय स्तर पर यदि इस औसत वृद्धि का आकलन किया जाए, तो यह कुल दस प्रतिशत से भी अधिक बैठती है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर साबित होगी।

पहली बार तय हुई न्यूनतम आधार मजदूरी, बढ़े वर्किंग डेज

केंद्र सरकार ने इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर 300 रुपये प्रतिदिन की न्यूनतम आधार मजदूरी तय करने का बड़ा फैसला लिया है। इससे पहले देश के कई हिस्सों में मजदूरी 300 रुपये से काफी कम थी और सबसे न्यूनतम दर 241 रुपये प्रतिदिन थी।

नई गाइडलाइंस के बाद ऐसी सभी कम मजदूरी दरों को बढ़ाकर तुरंत प्रभाव से कम से कम 300 रुपये कर दिया गया है। सरकार के इस कदम का सीधा लाभ देश की 21 राज्य और प्रशासनिक इकाइयों के अंतर्गत आने वाले लाखों ग्रामीण मजदूरों को मिलेगा।

इसके साथ ही सरकार ने ‘वीबी-जीरामजी’ योजना के तहत मिलने वाले रोजगार की गारंटी को भी 100 दिन से बढ़ाकर अब 125 दिन कर दिया है। यानी अब पात्र ग्रामीण परिवारों को पहले के मुकाबले पूरे 25 दिन अधिक काम करने का मौका मिलेगा।

काम के दिन बढ़ने और मजदूरी में इजाफा होने का सीधा सकारात्मक असर ग्रामीण परिवारों की मासिक आमदनी पर देखने को मिलेगा। नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सभी राज्यों को मजदूरी में एक समान वृद्धि नहीं दी गई है।

जिन राज्यों में मजदूरी पहले से बेहद कम थी, वहां विषमता दूर करने के लिए अधिक वृद्धि की गई है। ताकि राज्यों के बीच लंबे समय से चली आ रही आर्थिक खाई को पूरी तरह पाटा जा सके और उत्तर भारत के मजदूरों को राहत मिले।

हरियाणा, केरल और गोवा जैसे राज्यों में भी बढ़ी मजदूरी

जिन राज्यों में पहले से ही मजदूरी का स्तर अपेक्षाकृत काफी बेहतर था, वहां भी महंगाई के अनुसार संशोधित दरें लागू की गई हैं। नए चार्ट के मुताबिक, हरियाणा में अब नई मजदूरी बढ़कर 409 रुपये प्रतिदिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।

इसके अलावा दक्षिण भारतीय राज्य केरल में अब मजदूरों को 401 रुपये और गोवा में 406 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी मिलेगी। इसी तरह कर्नाटक और पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्यों में भी अब प्रतिदिन मजदूरी 360 रुपये से लेकर 409 रुपये तक हो जाएगी।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इन नई मजदूरी दरों को तय करते समय देश में मौजूदा महंगाई, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और अन्य महत्वपूर्ण आर्थिक मानकों को वैज्ञानिक आधार बनाया गया है, जिससे गांवों में क्रय शक्ति काफी मजबूत होगी।

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