Lucknow News: उत्तर प्रदेश में एक जिला एक उत्पाद यानी ओडीओपी योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों के लिए स्किल अपग्रेडेशन बेहद जरूरी हो चुका है। बदलते समय के साथ ग्राहकों की पसंद, आधुनिक डिजाइन और क्वालिटी स्टैंडर्ड भी तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में कारीगरों को मिल रहा ट्रेनिंग और टूलकिट सपोर्ट मील का पत्थर साबित हो रहा है।
आधुनिक टूलकिट और ट्रेनिंग सपोर्ट से काम की स्पीड में आई तेजी
पीआईबी के ताजा ओडीओपी अपडेट के अनुसार, स्किल डेवलपमेंट और टूलकिट डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम के तहत बड़ी संख्या में स्थानीय कारीगरों को एडवांस्ड ट्रेनिंग दी गई है। इसके साथ ही उन्हें आधुनिक टूलकिट सपोर्ट भी मिला है। इस मदद से कारीगर अपने पुराने हुनर को नए ग्लोबल मार्केट की जरूरतों के मुताबिक ढाल रहे हैं।
इस योजना में स्किल अपग्रेडेशन से जहां एक तरफ प्रोडक्ट की क्वालिटी बेहतर हो रही है, वहीं आधुनिक टूलकिट से काम की स्पीड काफी बढ़ गई है। प्रोफेशनल ट्रेनिंग की वजह से अब पारंपरिक उत्पादों के डिजाइन और फिनिशिंग में बड़ा सुधार आया है। यही सारे फैक्टर्स मिलकर स्थानीय प्रोडक्ट्स को इंटरनेशनल मार्केट के लिए तैयार कर रहे हैं।
पिछले छह वर्षों में यूपी के एक्सपोर्ट में दर्ज हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी
जब लोकल प्रोडक्ट की क्वालिटी, पैकेजिंग और ब्रांडिंग बेहतर होती है, तो वैश्विक बाजार का रास्ता अपने आप खुल जाता है। पीआईबी के डेटा के मुताबिक, ओडीओपी से जुड़े प्रयासों के कारण राज्य के एक्सपोर्ट में 76 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा युवाओं के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है।
उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात वर्ष 2017-18 में ₹88,967 करोड़ था, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ तक पहुंच गया। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि अगर लोकल प्रोडक्ट को सही सपोर्ट और सरकारी योजना का लाभ मिले, तो वह दुनिया के किसी भी बड़े बाजार में अपनी मजबूत जगह बना सकता है।
मुरादाबाद के मेटल और कन्नौज के इत्र को मिली ग्लोबल पहचान
उत्तर प्रदेश के कई ऐसे पारंपरिक उत्पाद हैं, जो नेशनल और ग्लोबल मार्केट में अपनी बहुत मजबूत पहचान बना रहे हैं। इनमें मुरादाबाद का मशहूर मेटल क्राफ्ट, वाराणसी की ऐतिहासिक साड़ी और भदोही का कालीन शामिल हैं। इन सभी प्रोडक्ट्स की डिमांड अब विदेशों में लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है।
इसके साथ ही कन्नौज का विश्व प्रसिद्ध इत्र और अलीगढ़ के मजबूत लॉक्स जैसे बेहतरीन प्रोडक्ट्स उत्तर प्रदेश की ग्लोबल पहचान को लगातार मजबूत कर रहे हैं। इन जिलों के उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों का मुख्य हिस्सा बन चुके हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों को सीधे बड़े खरीदार और बिजनेस ऑर्डर्स मिल रहे हैं।
युवा और महिलाएं संभाल रहे हैं डिजिटल बिजनेस की पूरी कमान
ओडीओपी योजना से अब केवल पुराने कारीगर ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के युवा और महिलाएं भी बड़े पैमाने पर जुड़ रहे हैं। वे अपनी रुचि और आधुनिक कौशल के अनुसार फोटो शूट, डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट, ऑनलाइन सेल, आकर्षक पैकेजिंग और कस्टमर सपोर्ट जैसे नए जमाने के कार्यों को संभाल रहे हैं।
इस आधुनिक बदलाव से परिवार का पारंपरिक काम अब एक कॉरपोरेट बिजनेस मॉडल का रूप ले चुका है। घर में एक सदस्य अगर प्रोडक्ट बनाता है, तो दूसरा उसकी सुरक्षित पैकिंग करता है। वहीं, तीसरा सदस्य उसे ई-कॉमर्स वेबसाइट पर अपलोड करता है और बाकी लोग डिलीवरी तथा कस्टमर सपोर्ट संभालते हैं।
ओडीओपी योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार
इस बेहतरीन योजना ने उत्तर प्रदेश के गांव-कस्बों के स्वदेशी प्रोडक्ट्स को देखने का पूरा नजरिया ही बदल दिया है। जो प्रोडक्ट पहले केवल स्थानीय ग्रामीण बाजारों तक सीमित थे, अब वे मजबूत ब्रांडिंग, शानदार पैकेजिंग, ई-कॉमर्स और सरकारी एक्सपोर्ट सपोर्ट की मदद से दुनिया के सबसे बड़े बाजारों की तरफ बढ़ रहे हैं।
यह बड़ा बदलाव केवल व्यापार बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे ग्रामीण कारीगरों के बढ़ते आत्मविश्वास की भी कहानी है। जब स्थानीय उत्पाद को बड़ी पहचान मिलती है, तो पूरे जिले का नाम रोशन होता है। मार्केट बड़ा होने से कारीगरों की कमाई बढ़ती है और ग्रामीण इकॉनमी को नई स्पीड मिलती है।

