अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय के इस्तीफे पर चर्चा तेज, सीए बजरंगलाल बागड़ा बन सकते हैं नए महासचिव

Ayodhya News: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के विवाद के बीच सोमवार को राम मंदिर परिसर में ट्रस्ट कार्यकारिणी की बेहद अहम बैठक जारी है। सूत्रों के मुताबिक, इस उच्च स्तरीय बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र का इस्तीफा स्वीकार किया जा सकता है।

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चंपत राय की जगह विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंगलाल बागड़ा पहली पसंद

महासचिव चंपत राय के विकल्प के तौर पर विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय और अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंगलाल बागड़ा का नाम सबसे आगे चल रहा है। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट बजरंगलाल बागड़ा ओडिशा में नालको के चेयरमैन रह चुके हैं। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद वे विहिप के राष्ट्रीय मंत्री बने थे।

इसके अलावा, भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश के संघचालक कृष्णमोहन को भी महासचिव पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। बैठक में बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक नीरज दौनेरिया के नाम और मंदिर के लिए नए सीईओ की नियुक्ति पर भी गंभीर चर्चा हो रही है।

महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में हो रही बैठक में कई दिग्गज जुड़े वर्चुअल माध्यम से

इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास कर रहे हैं। बैठक में कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि, जगद्गुरु माध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ, निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास और अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी व्यक्तिगत रूप से मौजूद हैं।

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वहीं, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र, उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद और प्रख्यात वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन वर्चुअल माध्यम से जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही दिवंगत सदस्य बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के स्थान पर किसी नए चेहरे को ट्रस्ट में शामिल करने पर भी विचार हो रहा है।

चोरी की घटना बेहद निंदनीय, निष्पक्ष जांच और पारदर्शी व्यवस्था के पक्ष में न्यासी

ट्रस्ट के भीतर इस समय दो अलग-अलग धड़े सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। एक पक्ष जहां पूरी तरह चंपत राय को निर्दोष बताते हुए उनके समर्थन में खड़ा है, वहीं दूसरा धड़ा संगठन की छवि को बचाने के लिए नए विकल्पों को तुरंत कमान सौंपने की वकालत कर रहा है।

राम मंदिर ट्रस्ट के वयोवृद्ध न्यासी स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने इस विवाद पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अपराध किसी का भी हो, उसे कभी क्षमा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में ऐसी घटना होना बेहद निंदनीय है और वे पूरी तरह से एक निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था के पक्ष में हैं।

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