Varanasi News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में बिजली के प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदले जाने के बाद से उपभोक्ताओं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्मार्ट मीटरों से अचानक कई गुना अधिक बिल आने की गंभीर शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन विभाग की ओर से इनका कोई स्थाई समाधान नहीं किया जा रहा है।
बिजली दफ्तरों में रोजाना पहुंच रहे पीड़ित उपभोक्ता, अधिकारी बना रहे बिल जमा करने का दबाव
बिजली वितरण खंडों के कार्यालयों और मुख्य उपकेंद्रों पर लगभग हर दिन बड़ी संख्या में परेशान बिजली उपभोक्ता अपनी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। उपभोक्ताओं की मानसिक परेशानी तब और ज्यादा बढ़ जाती है, जब संबंधित अधिकारी तकनीकी खामियों को सुधारने के बजाय उन पर तुरंत पूरा भारी-भरकम बिल जमा करने का दबाव बनाते हैं।
बिजली विभाग के आंतरिक फीडबैक के अनुसार, जुलाई के पहले ही हफ्ते में उपभोक्ताओं ने सामान्य से तीन से पंद्रह गुना अधिक बिल आने की दर्जनों लिखित शिकायतें दर्ज कराई हैं। इसके अलावा, पीड़ित उपभोक्ताओं ने उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 1912 और विभागीय सोशल मीडिया ग्रुप्स पर भी अपनी पीड़ा साझा की है।
मछोदरी उपकेंद्र के तहत आने वाली सुमन देवी का बिल दस हजार से सीधे 51 हजार रुपये पहुंचा
वाराणसी के सेवा चौधरी गली में रहने वाली सुमन देवी मछोदरी उपकेंद्र की नियमित उपभोक्ता हैं। नया कनेक्शन लेने के बाद से उनके घर का मासिक बिल औसतन नौ से दस हजार रुपये के बीच आता था। जून के महीने में भी उनका बिल 9,034 रुपये आया था, जिसका उन्होंने समय पर पूरा भुगतान कर दिया था।
इसके बाद तीन जुलाई को जब उनके मोबाइल पर अचानक 51,334 रुपये बिजली बिल का मैसेज आया, तो उनके होश उड़ गए। इस अप्रत्याशित बिलिंग के खिलाफ उन्होंने तुरंत बिजली विभाग के आला अधिकारियों से मिलकर गुहार लगाई, लेकिन वर्तमान में उनकी इस समस्या पर कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है।
स्मार्ट मीटर की रहस्यमयी रीडिंग उपभोक्ताओं की समझ से परे, तीन दिन में आया ग्यारह सौ बिल
वाराणसी के स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि नए पोस्टपेड स्मार्ट मीटरों की डिजिटल रीडिंग उनकी समझ से पूरी तरह परे है। कनेक्शन नंबर-324255036 पर पहले केवल 35 रुपये बिजली बिल का मैसेज आया था। इतनी कम राशि देखकर जब जागरूक उपभोक्ता तीन दिन बाद खुद उपकेंद्र पहुंचा, तो वहां हकीकत कुछ और ही निकली।
बिजली उपकेंद्र के कंप्यूटर सिस्टम पर जांच करने पर पता चला कि उनका वास्तविक बिल 35 रुपये नहीं, बल्कि सीधे 1,100 रुपये जनरेट हुआ है। अब महज तीन दिन के भीतर 1,100 रुपये की भारी बिलिंग होने से उपभोक्ता इस बात की पूरी आशंका जता रहे हैं कि विभाग के स्मार्ट मीटर बहुत तेज गति से चल रहे हैं।
घर पर तीन किलोवाट का सोलर पैनल होने के बावजूद शमीम का बिजली बिल हुआ दोगुना
इसी तरह का एक और चौंकाने वाला मामला रामनगर उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले उपभोक्ता शमीम का सामने आया है। जून के महीने में उन्होंने अपने घरेलू कनेक्शन के लिए 5,200 रुपये के बिजली बिल का ऑनलाइन भुगतान किया था, लेकिन जुलाई महीने में विभाग ने उन्हें सीधे 10,130 रुपये का भारी बिल थमा दिया।
शमीम की परेशानी इसलिए भी बड़ी है क्योंकि उनके घर की छत पर पहले से ही तीन किलोवाट का आधुनिक सोलर पैनल सिस्टम लगा हुआ है। दिन के समय सोलर पावर से बिजली की बड़ी बचत होने के बावजूद भी स्मार्ट मीटर की मनमानी की वजह से उनका बिल अचानक दोगुना होकर आ रहा है।
मैदागिन उपकेंद्र के तहत प्रीपेड से पोस्टपेड होते ही सुनील का बिल 17 हजार के पार पहुंचा
भूतभैरव के निवासी सुनील का घरेलू बिजली कनेक्शन मैदागिन उपकेंद्र से जुड़ा हुआ है। उनके घर पर लगभग तीन महीने पहले ही नया प्रीपेड मीटर लगाया गया था, जिसे ठीक दो महीने पहले अचानक पोस्टपेड में बदल दिया गया। इसके बाद जून में उन्हें 13,231 रुपये का भारी-भरकम बिजली बिल प्राप्त हुआ था।
जुलाई का महीना आते ही उनका बिल और ज्यादा बढ़कर 17,261 रुपये तक पहुंच गया। सुनील ने इस अत्यधिक बिलिंग के खिलाफ तत्काल बिजली दफ्तर में लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन विभाग के जिम्मेदार जूनियर इंजीनियर और एसडीओ स्तर से अब तक इस मामले में कोई ठोस राहत या समाधान नहीं मिला है।
वाराणसी के सैकड़ों बिजली उपभोक्ताओं ने खोला मोर्चा, मीटरों की तकनीकी जांच कराने की मांग
मछोदरी की सुमन देवी, रामनगर के शमीम और भूतभैरव के सुनील के मामले तो सिर्फ कुछ चुनिंदा उदाहरण मात्र हैं। वाराणसी शहर और ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट मीटरों की इस कथित मनमानी बिलिंग से परेशान आम उपभोक्ताओं की कुल संख्या हजारों में बताई जा रही है, जो बिजली दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
शहर के अन्य प्रमुख बिजली उपभोक्ता कुंज कुमार, खुर्शीद कौर और विश्वनाथ ने भी संयुक्त रूप से बताया कि पोस्टपेड स्मार्ट मीटर सामान्य मीटरों की तुलना में बहुत तेज भाग रहे हैं। उपभोक्ताओं ने राज्य सरकार और पावर कारपोरेशन के चेयरमैन से मांग की है कि इन मीटरों की लैब में निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए।

