Lucknow News: उत्तर प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजीन यानी ओडीओसी योजना के तहत राज्य के युवा अब विभिन्न कमर्शियल रोल्स में बहुत जल्दी ट्रेनिंग लेकर अपना काम शुरू कर सकते हैं। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि यह बिजनेस मॉडल अब केवल बड़े महानगरों तक ही सीमित नहीं रहने वाला है।
छोटे शहरों और ग्रामीण कस्बों में भी तेजी से बढ़ेंगे फूड सर्विस के बड़े मौके
राज्य सरकार की इस नई पहल से अब प्रदेश के छोटे शहरों और ग्रामीण कस्बों में भी फूड सर्विस से जुड़े स्वरोजगार के बेहतरीन नए मौके बनने जा रहे हैं। ओडीओसी योजना को लंबे समय तक आत्मनिर्भर और मजबूत बनाए रखने के लिए अब इसे सीधे तौर पर व्यावसायिक शिक्षा से भी जोड़ा जा रहा है।
प्रदेश के प्रमुख स्कूलों, डिग्री कॉलेजों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक संस्थानों और विभिन्न सरकारी स्किल सेंटर्स में युवाओं को फूड सेक्टर की बुनियादी ट्रेनिंग दी जाएगी। इस ट्रेनिंग में मुख्य रूप से किचन हाइजीन, बेसिक कुकिंग, फूड कॉस्टिंग, आकर्षक मेन्यू प्लानिंग, पैकेजिंग और ग्राहक व्यवहार जैसी महत्वपूर्ण चीजें शामिल होंगी।
पढ़ाई के साथ डिजिटल पेमेंट और बिजनेस की बेसिक समझ भी सीखेंगे छात्र
इसके साथ ही छात्रों को डिजिटल पेमेंट और बिजनेस मैनेजमेंट की बेसिक समझ भी प्रैक्टिकल तरीके से सिखाई जाएगी। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि राज्य के युवा अब अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ सीधे तौर पर व्यावहारिक काम के लिए भी पूरी तरह तैयार हो सकेंगे।
आमतौर पर अधिकांश युवा अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद बड़े शहरों में नौकरी खोजने के लिए भटकते हैं। यदि उन्हें छात्र जीवन में ही अपने गृह जिले की फूड इकॉनमी की अच्छी समझ मिल जाए, तो वे लोकल स्तर पर भी सम्मानजनक काम ढूंढ सकते हैं या अपना खुद का छोटा बिजनेस शुरू कर सकते हैं।
जिला स्तर पर आयोजित होने वाले फूड इवेंट्स से बढ़ेगी स्थानीय कारीगरों की कमाई
उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले की पारंपरिक क्यूज़ीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे फूड इवेंट्स भी बहुत बड़ा रोल निभा सकते हैं। सरकार की योजना के अनुसार, जिला स्तर पर विशेष फूड डे, कॉलेज फूड फेस्ट, स्थानीय मेले और सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किए जाएंगे।
इसके अलावा, प्रमुख रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और हवाई अड्डों पर विशेष टेस्ट काउंटर तथा व्यस्त बाजारों में आधुनिक फूड स्टॉल भी लगाए जा रहे हैं। ऐसे शानदार आयोजनों से स्थानीय स्तर पर दो बड़े फायदे सीधे तौर पर देखने को मिलेंगे, जिससे पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
स्थानीय लोगों को मिलेगी स्वाद की नई पहचान और युवाओं को मिलेगा बड़ा बाजार
इन अनूठे आयोजनों से पहला फायदा यह होगा कि आम लोगों को अपने ही जिले के पारंपरिक और शुद्ध स्वाद की एक नई डिजिटल पहचान मिलेगी। दूसरा फायदा यह होगा कि नए युवाओं और छोटे फूड कारोबारियों को सीधे बड़े ग्राहकों के सामने अपनी कला का प्रदर्शन करने का शानदार मौका मिलेगा।
राज्य के कई नौजवान ऐसे लाइव इवेंट्स में अपने स्टॉल लगाकर बिजनेस की बारीकियों को बहुत आसानी से समझ सकते हैं। यहां उन्हें लाइव फीडबैक मिलता है कि ग्राहक असल में क्या पसंद करता है, किस तरह की पैकिंग में सामान ज्यादा बिकता है और किस सही दाम पर बाजार में मांग बनती है।
ओडीओसी योजना सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं, यह है रोजगार का नया भरोसा
विशेषज्ञों का मानना है कि ओडीओसी योजना को केवल खाने-पीने की पहचान तक ही सीमित रखकर नहीं देखना चाहिए। यह वास्तव में पूरे फूड सेक्टर को नए रोजगार, आधुनिक स्किल, महिलाओं की आत्मनिर्भरता, किसानों की समृद्धि और छोटे स्थानीय बिजनेसेज को एक मजबूत कॉर्पोरेट चेन से जोड़ने का बड़ा मौका है।
अगर जिले की खास क्यूज़ीन के आसपास आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर, बड़े फूड हब, लोकल सोर्सिंग नेटवर्क, डिजिटल ऑर्डर सिस्टम और छोटे स्मार्ट स्टॉल मॉडल तैयार होते हैं, तो युवाओं को अपने ही शहर में रोजगार मिल जाएगा। इससे महिलाओं के हाथ के स्वाद को भी सीधे तौर पर अच्छी कमाई में बदला जा सकता है।
किसानों की फसलों को मिलेंगे स्थानीय खरीदार और जिले को मिलेगी नई आर्थिक ग्रोथ
इस योजना के प्रभावी रूप से लागू होने से हमारे स्थानीय किसानों की उपज को सीधे उनके गांव के पास ही बड़े खरीदार मिल जाएंगे। इसके साथ ही, छोटे दुकानदार और पारंपरिक हलवाई भी ज्यादा संगठित और कॉर्पोरेट तरीके से आगे बढ़ सकेंगे, जिससे उनका मुनाफा कई गुना बढ़ जाएगा।
यही असल में एक जिला-एक क्यूज़ीन की दूरदर्शी सोच का रोजगार पर पड़ने वाला सबसे सकारात्मक और जमीनी असर है। पारंपरिक स्वाद से सबसे पहले जिले की एक नई पहचान बनती है, फिर उस पहचान से बाजार में मांग बढ़ती है, मांग बढ़ने से नए काम बनते हैं और काम से पूरे जिले की ग्रोथ होती है।

