परिषदीय स्कूलों में बच्चों को पढ़ाया जाएगा खुद की सुरक्षा का पाठ, ‘गुड टच-बैड टच’ को लेकर 90 हजार छात्र होंगे जागरूक

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Uttar Pradesh News: बदलते समय और आधुनिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों के बच्चों को अब खुद की सुरक्षा का विशेष पाठ पढ़ाया जाएगा। बेसिक शिक्षा परिषद ने सरकारी स्कूलों के बच्चों को सुरक्षित और जागरूक बनाने के लिए इस बेहद महत्वपूर्ण और नई पहल की शुरुआत की है।

इस नई पहल के तहत अब कक्षा एक से लेकर कक्षा आठ तक के सभी छात्र-छात्राओं को उनकी उम्र और समझ के अनुसार व्यक्तिगत सुरक्षा, ‘गुड टच-बैड टच’ (सही और गलत स्पर्श) और किसी भी प्रकार की असहज परिस्थितियों से बचाव के बारे में विस्तार से जागरूक किया जाएगा।

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जिले के पांच सौ से अधिक स्कूलों के बच्चों को मिलेगा सीधा लाभ

शिक्षा विभाग के अनुसार, इस विशेष जागरूकता अभियान का सीधा लाभ जिले के 511 प्राथमिक (Primary) और उच्च प्राथमिक (Upper Primary) विद्यालयों के करीब 90 हजार छात्र-छात्राओं को मिलेगा। विभाग ने इस विषय को पहली बार बच्चों के नियमित शैक्षणिक कैलेंडर में आधिकारिक रूप से शामिल किया है।

इसके तहत स्कूल के शिक्षक बच्चों को बेहद सरल, सहज और संवेदनशील तरीके से समझाएंगे कि सही और गलत स्पर्श में क्या बुनियादी अंतर होता है। इसके साथ ही बच्चों को यह भी बताया जाएगा कि उनके निजी अंगों की सुरक्षा क्यों जरूरी है और किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में उन्हें तुरंत कैसी प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

बच्चों को जागरूक बनाना है उद्देश्य, मन में डर पैदा करना नहीं

मूल्यांकन और योजना के संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) राहुल पंवार ने स्पष्ट रूप से बताया कि बच्चों के मन में किसी भी प्रकार का डर पैदा करना इस पहल का उद्देश्य बिल्कुल नहीं है। इसका मुख्य मकसद उन्हें अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक और सतर्क बनाना है।

इसके जरिए बच्चों में यह गहरा भरोसा जगाया जाएगा कि किसी भी गलत या असहज करने वाली घटना की जानकारी वे बिना किसी डर या झिझक के सीधे अपने माता-पिता, क्लास टीचर या समाज के किसी भी अन्य भरोसेमंद व्यक्ति को तुरंत दें। शिक्षकों को इस दौरान पूरी संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बच्चों पर कोई मानसिक दबाव न पड़े।

कानूनी संरक्षण और इन पांच प्रमुख बिंदुओं पर दिया जाएगा विशेष जोर

इस अभियान के अंतर्गत बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा से जुड़े कानूनों और विभिन्न आपातकालीन सरकारी हेल्पलाइन नंबरों की भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। शिक्षा विभाग का दृढ़ मानना है कि शुरुआती उम्र से ही मिलने वाली यह सुरक्षा संबंधी जानकारी बच्चों को भविष्य के लिए आत्मविश्वासी और मानसिक रूप से मजबूत बनाएगी।

  • गुड टच और बैड टच की पहचान: बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बीच का अंतर स्पष्ट सिखाया जाएगा।
  • असहज स्थिति में ‘ना’ कहना: किसी भी विपरीत या अजीब परिस्थिति में बिना डरे ‘नो’ (No) बोलना और तुरंत उस स्थान से हट जाना।
  • व्यक्तिगत सीमाओं की समझ: अपने निजी अंगों और शरीर की व्यक्तिगत सीमाओं को समझना।
  • हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी: बच्चों के लिए जारी विशेष सरकारी सहायता नंबरों और चाइल्ड हेल्पलाइन की जानकारी देना।
  • तुरंत मदद मांगना: किसी भी अप्रिय घटना के होने पर परिवार या शिक्षकों जैसे भरोसेमंद व्यक्ति से बिना छुपाए तुरंत मदद की गुहार लगाना।
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