Defense News: भारत के स्वदेशी चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट तेजस एमके1ए ने रक्षा क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। ताजा सैन्य रिपोर्ट के अनुसार इस विमान ने तकनीकी क्षमता के मामले में चीन के जे-10सी और जेएफ-17 जैसे लड़ाकू विमानों को बहुत पीछे छोड़ दिया है।
कम रडार क्रॉस सेक्शन तकनीक से लैस है तेजस
लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए की सबसे बड़ी ताकत इसका बेहद कम रडार क्रॉस सेक्शन होना है। तेजस का रडार क्रॉस सेक्शन मात्र 0.5 वर्ग मीटर है। इसकी तुलना में चीनी जे-10सी और जेएफ-17 का रडार क्रॉस सेक्शन दोगुने से भी अधिक 1 से 1.5 वर्ग मीटर है।
रडार क्रॉस सेक्शन कम होने के कारण तेजस एमके1ए को दुश्मन के आधुनिक सर्विलांस सिस्टम बहुत आसानी से डिटेक्ट नहीं कर पाएंगे। यह अनूठी खूबी इस भारतीय विमान को काफी हद तक सेमी-स्टील्थ फाइटर जेट की विशिष्ट श्रेणी में लाकर खड़ा कर देती है, जिससे दुश्मन भ्रमित रहेगा।
अत्याधुनिक एईएसए रडार और अस्त्र मिसाइल से ताकत दोगुनी
इस लड़ाकू विमान में अत्यंत शक्तिशाली एईएसए रडार सिस्टम लगाया गया है। इस तकनीक की वजह से भारतीय पायलट दुश्मन के ठिकानों को बहुत दूर से ही पहचान लेंगे। इसके साथ ही इसमें तैनात स्वदेशी अस्त्र एमके1 बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल की मारक क्षमता 160 किलोमीटर है।
दूसरी ओर चीन के विमानों में लगी पीएल-15 मिसाइलों की रेंज केवल 140 से 145 किलोमीटर तक ही सीमित है। भारतीय वायुसेना अपनी इस ताकत को बढ़ाने के लिए कुल 180 तेजस एमके1ए जेट्स खरीद रही है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड इन विमानों का निर्माण कर रही है।

