Delhi News: पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार को ट्रैक करना अब बेहद मुश्किल हो गया है। विश्लेषकों के अनुसार इस युद्ध के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला टैंकर ट्रैफिक युद्ध से पहले की तुलना में 90% से 95% तक पूरी तरह टूट चुका है।
इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से तेल की कुछ खेप अभी भी लगातार निकल रही हैं। लेकिन सुरक्षा कारणों से वे अब इतने गुप्त तरीके से आगे बढ़ रही हैं कि वैश्विक स्तर पर तेल और गैस के वास्तविक प्रवाह को ट्रैक करना और खरीदारों तक पहुंचने वाली सटीक ऊर्जा आपूर्ति का पता लगाना लगभग नामुमकिन हो गया है।
क्या है जहाजों की यह अनोखी ‘डार्क-मोड’ रणनीति?
शिपिंग डेटा के ताजा विश्लेषण के अनुसार अधिकांश तेल टैंकर अब पूरी तरह ‘डार्क मोड’ रणनीति के तहत काम कर रहे हैं। ये जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करते समय या फारस की खाड़ी में नया माल लादने के लिए प्रवेश करते समय अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी ट्रांसपोंडर को पूरी तरह बंद कर देते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक पहले इस खतरनाक रणनीति का इस्तेमाल केवल ईरान से जुड़े जहाज ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए चोरी-छिपे करते थे। लेकिन वर्तमान युद्ध को देखते हुए अब यह जानलेवा रास्ता आम कमर्शियल जहाजों के लिए भी एक बहुत ही सामान्य और सुरक्षात्मक बात बन गई है।
भारत समेत कई बड़े एशियाई देशों को गुप्त रूप से तेल सप्लाई
मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म वोर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार इस अशांत क्षेत्र से गुजरने वाले करीब 57% जहाजों ने अपने ट्रांसपोंडर पूरी तरह बंद रखे। मई के महीने में यह आंकड़ा रिकॉर्ड 65.2% तक पहुंच गया था। इस भयंकर संकट के बीच भी पाकिस्तान, भारत और चीन जैसे एशियाई खरीदारों के लिए गुप्त रास्तों से तेल की खेप लगातार भेजी जा रही है।
माना जा रहा है कि इस गुप्त सप्लाई के लिए ईरान की ओर से स्वीकृत विशेष रास्तों और सुरक्षित कॉरिडोर का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस समुद्री रास्ते पर अब पूरी तरह से ईरान का सैन्य और परिचालन नियंत्रण बहुत मजबूत हो चुका है।
बाजार के सामान्य होने की सारी उम्मीदें अब टूटीं
शुरुआत में दुनिया भर के बाजार विश्लेषक यह मानकर चल रहे थे कि मई तक यह भीषण युद्ध समाप्त हो जाएगा। इसके बाद जून महीने से होर्मुज जलडमरूमध्य का ट्रैफिक फिर से सामान्य होने लगेगा। लेकिन यह युद्ध अब अपने चौथे महीने में प्रवेश कर चुका है और स्थिति सामान्य होने से कोसों दूर है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि यह व्यस्त समुद्री रूट अब वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए कभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाएगा। भविष्य में किसी भी संभावित शांति समझौते के बाद भी ईरान इस संवेदनशील व्यापारिक रास्ते पर अपना कड़ा परिचालन नियंत्रण हमेशा बनाए रखना चाहता है।
Author: Rajesh Kumar

