New Delhi News: रेल मंत्रालय ने देश के रक्षा मंत्रालय के उस विशेष अनुरोध को पूरी तरह ठुकरा दिया है, जिसमें सैन्य विशेष ट्रेनों के न्यूनतम आकार को 30 डिब्बों से घटाकर 20 करने की मांग की गई थी। इसके साथ ही रक्षा मंत्रालय ने उसी के अनुपात में माल भाड़े में भी विशेष छूट देने की सिफारिश की थी।
रेल मंत्रालय ने इस सरकारी अनुरोध को परिचालन संबंधी गंभीर बाधाओं और तकनीकी नियमों का हवाला देते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है। रेलवे का मानना है कि इस तरह के बदलावों से रेलवे की सुचारू संचालन व्यवस्था और राजस्व प्रणाली पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
वर्तमान नीति के तहत न्यूनतम 30 डिब्बों की संरचना है अनिवार्य
वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान नीति के तहत भारतीय रेलवे की मानक लागत निर्धारण प्रणाली मुख्य रूप से न्यूनतम 30 डिब्बों की ट्रेन संरचना पर ही आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रेनों में डिब्बों की संख्या कम करने से रेलवे की वास्तविक परिचालन लागत में उसी अनुपात में कमी बिल्कुल नहीं आएगी।
इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने सैन्य बलों की त्वरित और सुगम आवाजाही के लिए सैन्य विशेष ट्रेनों का संचालन न्यूनतम 30 के बजाय केवल 20 डिब्बों के साथ करने की अनुमति मांगी थी। इसके साथ ही सेना ने इसके अनुरूप लागू होने वाले कुल परिवहन शुल्क में भी रियायत देने की अपील की थी।
रेलवे बोर्ड के यातायात परिवहन निदेशालय ने की मामले की समीक्षा
रेलवे बोर्ड ने रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को भेजे अपने आधिकारिक पत्र में कहा कि इस संवेदनशील मामले की रेलवे बोर्ड के यातायात परिवहन निदेशालय से गहन परामर्श के बाद समीक्षा की गई है। बोर्ड के अनुसार, वर्तमान में लागू सभी दिशा-निर्देश पूरी तरह यथावत रहेंगे।
रेलवे ने अपने पत्र में साफ लिखा है कि सैन्य ट्रेनों की न्यूनतम संरचना और लागत निर्धारण मानक को 30 डिब्बों से नीचे करने में कोई भी नई छूट देना परिचालन की दृष्टि से व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसलिए सेना को अपने परिवहन के लिए पुरानी व्यवस्था का ही पालन करना होगा।

