New Delhi News: चीन द्वारा पाकिस्तान के लिए विशेष रूप से बनाई गई अत्याधुनिक पनडुब्बी ‘पीएनएस हंगोर’ ने कराची में पाकिस्तानी नौसेना में शामिल होने के बाद श्रीलंका की राजधानी कोलंबो का आधिकारिक दौरा किया है। इस कूटनीतिक दौरे से लौटते वक्त पाकिस्तानी नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बड़े संकेत दिए हैं।
पाकिस्तानी अधिकारी के मुताबिक यह खतरनाक पनडुब्बी आने वाले दिनों में फिर से बंगाल की खाड़ी का रुख करेगी। इस संभावित हलचल और रणनीतिक सूचना के सामने आने के बाद भारतीय नौसेना पूरी तरह अलर्ट हो गई है। भारतीय खुफिया एजेंसियां और नौसैनिक बल इस पनडुब्बी की हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहे हैं।
आधुनिक स्टील्थ तकनीक और बेहतरीन प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है हंगोर
तकनीकी रूप से पीएनएस हंगोर एक बेहद आधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक स्टील्थ पनडुब्बी (Stealth Submarine) है। यह उन आठ विशेष पनडुब्बियों के बेड़े में से बिल्कुल पहली है, जिन्हें चीन और पाकिस्तान का रक्षा तंत्र मिलकर तैयार कर रहे हैं। इस पनडुब्बी की मारक क्षमता और छिपने की तकनीक बेहद उन्नत श्रेणी की है।
भारतीय नौसेना के वर्तमान डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के बेड़े की तुलना में इसका ‘एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम’ (AIP) काफी ज्यादा बेहतर और आधुनिक माना जा रहा है। इस उन्नत सिस्टम के कारण यह पनडुब्बी अपनी बैटरी चार्ज करने के लिए समुद्र की सतह पर आए बिना लगातार तीन हफ्ते तक पानी के नीचे छिपी रह सकती है।
बांग्लादेश का चीनी निर्मित नौसैनिक अड्डा बीएनएस पेकुआ बढ़ाएगा चिंता
दूसरी ओर, इस पूरे समुद्री घटनाक्रम के बीच बांग्लादेश का आधुनिक नौसैनिक अड्डा ‘बीएनएस पेकुआ’ भी रणनीतिक चर्चा में आ गया है। इस बेस को चीन ने बांग्लादेश के लिए कॉक्स बाजार के पास विशेष रूप से विकसित किया है। इस विशाल नौसैनिक अड्डे पर एक साथ आठ युद्धपोत और छह पनडुब्बियां आसानी से रुक सकते हैं।
चूंकि वर्तमान में बांग्लादेश की नौसेना के पास कुल मिलाकर केवल दो ही पनडुब्बियां मौजूद हैं, इसलिए रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस आधुनिक बेस का इस्तेमाल मुख्य रूप से चीनी और उनके मित्र देशों के जहाजों व पनडुब्बियों को सुरक्षित ठहराने के लिए ही किया जाएगा, जो भारत के लिए रणनीतिक चुनौती है।
भारतीय नौसेना के पूर्व वाइस एडमिरल ने सुरक्षा को लेकर जताई गंभीर चिंता
भारतीय नौसेना के एक सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल ने देश की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बीएनएस पेकुआ निश्चित रूप से भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय बनने वाला है। अगर भविष्य में चीनी और पाकिस्तानी युद्धपोत या पनडुब्बियां वहां रुकती हैं, तो नई दिल्ली कूटनीतिक रूप से कुछ नहीं कर पाएगी।
पूर्व सैन्य अधिकारी के अनुसार ऐसी स्थिति में भारत को उस क्षेत्र की निगरानी के लिए अपने बहुत अधिक सैन्य संसाधनों को तैनात करना होगा। इसके परिणामस्वरूप देश के दूसरे महत्वपूर्ण समुद्री इलाके बिना कड़ी निगरानी के रह जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान की यह भारत को घेरने की एक सोची-समझी सैन्य रणनीति है।

