Dehradun News: देश में एमबीबीएस के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन (एमडी, एमएस और डिप्लोमा) पाठ्यक्रमों में प्रवेश की तैयारी कर रहे डॉक्टरों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने इस साल से नीट पीजी परीक्षा के पैटर्न और नियमों में कई बड़े और कड़े बदलाव कर दिए हैं।
संस्थान द्वारा जारी नए शेड्यूल और गाइडलाइन के अनुसार, आगामी 30 अगस्त को ‘कंप्यूटर बेस्ड मोड’ पर होने जा रही इस परीक्षा में अब 200 की जगह केवल 180 प्रश्न ही पूछे जाएंगे। इस राष्ट्रीय परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें अभ्यर्थियों के पास आगामी 21 जुलाई तक का समय होगा।
इस बार पांच अलग सेक्शंस में बंटा होगा पूरा प्रश्नपत्र
नए नियमों के तहत पूरे प्रश्नपत्र को पांच अलग-अलग सेक्शंस में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक सेक्शन में 36 प्रश्न शामिल होंगे और छात्रों को हर एक हिस्से को हल करने के लिए 42 मिनट का समय अलॉट किया जाएगा। एक सेक्शन की समय सीमा समाप्त होते ही वह स्क्रीन से हमेशा के लिए लॉक हो जाएगा।
छात्र चाहकर भी पुराने सेक्शन के प्रश्नों को दोबारा नहीं देख सकेंगे। आवेदन के लिए उम्मीदवारों के पास नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मान्यता प्राप्त एमबीबीएस डिग्री या प्रोविजनल सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। साथ ही उनकी अनिवार्य इंटर्नशिप आगामी 30 सितंबर तक पूरी हो जानी चाहिए।
परीक्षा केंद्रों के आवंटन में खत्म हुआ पुराना नियम
पेपर लीक की कथित घटनाओं, परीक्षा सेंटर्स पर धांधली और फर्जी परीक्षार्थियों के मामलों को रोकने के लिए बोर्ड ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। अब परीक्षा केंद्रों के आवंटन में पहले की तरह ‘पहले आओ-पहले पाओ’ का नियम पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
अब आवेदन की तारीख से कोई फर्क नहीं पड़ेगा और परीक्षा केंद्र पूरी तरह कंप्यूटर के माध्यम से रैंडम तरीके से ही आवंटित किए जाएंगे। इसके अलावा अभ्यर्थियों को परीक्षा के लिए केवल तीन राज्यों का ही विकल्प मिलेगा, जिसमें पहला राज्य उनका स्थायी निवास होना अनिवार्य है। बाकी दो विकल्प पड़ोसी राज्यों के होंगे।
पहचान छिपाने वालों पर नकेल कसने के लिए सख्त बायोमैट्रिक
परीक्षा केंद्रों पर इस बार डिजिटल फेस रिकॉग्निशन और उंगलियों के फिंगरप्रिंट का कड़ा सत्यापन किया जाएगा। इसलिए अभ्यर्थी अपनी उंगलियों पर मेहंदी, स्याही या कोई पेंट नहीं लगा सकते हैं। फिंगरप्रिंट मैच न होने की विशेष स्थिति में उम्मीदवारों का आधुनिक आईरिस (आंख) स्कैन किया जाएगा।
उत्तराखंड के पांच सरकारी और चार निजी मेडिकल कॉलेजों में एमडी, एमएस की 700 से अधिक सीटें उपलब्ध हैं, जबकि देशभर में कुल सीटों की संख्या लगभग 52 हजार है। हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. डॉ. विजय जुयाल के मुताबिक काउंसलिंग की तैयारियां तेजी से जारी हैं।
नर्सिंग और पैरामेडिकल परीक्षा का रिजल्ट इसी हफ्ते होगा जारी
उत्तराखंड राज्य में बीते 13 और 14 जून को आयोजित की गई नर्सिंग और पैरामेडिकल प्रवेश परीक्षा के परिणाम भी अब अंतिम चरण में हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इन परीक्षाओं के सटीक नतीजे इसी हफ्ते की तय समय सीमा के भीतर जारी होने की पूरी संभावना है।
वर्तमान समय में पूरे प्रदेश के विभिन्न सरकारी और निजी संस्थानों में नर्सिंग तथा पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों की कुल 15 हजार सीटें मौजूद हैं। चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय को कुछ विशेष संस्थानों से पीजी सीटों का नया डाटा लगातार प्राप्त हो रहा है, जिससे सीटों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।

