मेरठ में कोचिंग सेंटर्स की सुरक्षा पर बड़ा खतरा, अधिकांश संस्थानों के पास नहीं है फायर एनओसी

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Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ में चल रहे कोचिंग सेंटर्स पर आग का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। लखनऊ में हाल ही में हुए अग्निकांड के बाद हुई जांच में सामने आया कि शहर के अधिकतर कोचिंग संस्थानों के पास फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी नहीं है। इससे हजारों छात्रों की जान जोखिम में पड़ी है।

फायर विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर रिहायशी घरों, बेसमेंट और व्यावसायिक परिसरों में चल रहे हैं। जांच के दौरान कई सेंटर्स में सुरक्षा के जरूरी इंतजाम गायब मिले। विभाग ने इन संस्थानों को नोटिस जारी किए हैं और चेताया है कि यदि कमियां जल्द दूर नहीं की गईं तो सख्त कार्रवाई होगी।

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अधूरी सुरक्षा और भगदड़ का बड़ा डर

कोचिंग सेंटर्स में इमरजेंसी एग्जिट, स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसे सुरक्षा उपकरण या तो लगे ही नहीं हैं या वे पूरी तरह खराब हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आग से ज्यादा खतरा भगदड़ का होता है। संकरी सीढ़ियां और ओवरक्राउडिंग किसी भी हादसे के समय छात्रों के लिए काल साबित हो सकती है, इसलिए सुरक्षा मानक अनिवार्य हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पेरेंट्स कोचिंग चुनते समय अक्सर केवल ब्रांड नाम देखते हैं, सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते। यह एक गंभीर लापरवाही है। कोचिंग सेंटर्स को भी समझना चाहिए कि अग्निशमन यंत्र केवल दीवार पर लटकाना काफी नहीं है। उसे चलाने का प्रशिक्षण और पूरा फायर सेफ्टी सिस्टम होना बेहद जरूरी है ताकि आपातकाल में जान बचाई जा सके।

एनओसी के लिए जरूरी मानक और नियम

नियमों के अनुसार, नौ मीटर से ऊंचे भवन में कोचिंग चलाने के लिए नक्शा स्वीकृत होना चाहिए। हर इमारत में कम से कम दो चौड़े निकास मार्ग हों और उन पर कभी ताला नहीं लगना चाहिए। इसके अलावा, अच्छी गुणवत्ता वाली बिजली वायरिंग, पर्याप्त पानी की व्यवस्था और स्पष्ट चमकने वाले एग्जिट संकेत बोर्ड लगाना हर हाल में जरूरी है।

एडमिशन लेने से पहले रखें ये सावधानी

छात्रों और अभिभावकों को किसी भी कोचिंग में एडमिशन लेने से पहले सुरक्षा की खुद जांच करनी चाहिए। हमेशा देखें कि बिल्डिंग में बाहर निकलने का रास्ता सुरक्षित है या नहीं। यदि क्लास बेसमेंट में है या संस्थान में भीड़ बहुत ज्यादा है, तो सुरक्षा के बारे में सवाल पूछने में बिल्कुल भी संकोच न करें।

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