Delhi News: देश की राजधानी में खुले घूमने वाले आवारा जानवरों और स्ट्रीट डॉग्स की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार ने एक बेहद आधुनिक कदम उठाया है। सरकार ने इन बेसहारा पशुओं की सटीक संख्या का पता लगाने के लिए आधिकारिक तौर पर ‘भारतीय पशुधन पोर्टल’ लॉन्च कर दिया है।
इस नए डिजिटल सिस्टम के तहत अब हर आवारा जानवर और स्ट्रीट डॉग को एक विशेष माइक्रोचिप लगाई जाएगी। इस माइक्रोचिप के जरिए प्रत्येक जानवर को 15 अंकों की एक यूनीक आईडी (विशिष्ट पहचान) मिलेगी। एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली सरकार इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए मुख्य नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रही है।
चार साल तक चलेगा बेसहारा पशुओं का यह आधुनिक प्रोजेक्ट
एनिमल हसबैंड्री डिपार्टमेंट द्वारा सभी संबंधित विभागों को इस नए पोर्टल का लॉगइन आईडी देने का काम तेजी से किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा प्रोजेक्ट आगामी 4 साल तक लगातार चलेगा। इस बड़े प्रोजेक्ट पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
जैसे ही कोई बड़ी सरकारी या गैर सरकारी कंपनी या सामाजिक संस्था इस निर्धारित धनराशि को खर्च करने के लिए तैयार होगी, वैसे ही इस जमीनी प्रोजेक्ट पर काम पूरी रफ्तार से शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल दिल्ली में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को रोकना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
दिल्ली में स्ट्रीट डॉग्स की आबादी रोकने के लिए विशेष योजना
एमसीडी ने दिल्ली के विभिन्न इलाकों में स्ट्रीट डॉग्स की आबादी को सही तरीके से कंट्रोल करने के लिए अलग-अलग 20 अनुभवी एनजीओ को जिम्मेदारी सौंपी है। इन चुनिंदा संस्थाओं को स्ट्रीट डॉग्स के स्टरलाइजेशन (नसबंदी) और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन का बेहद महत्वपूर्ण काम सौंपा गया है।
इन तमाम प्रयासों के बावजूद दिल्ली की सड़कों और सोसायटियों में स्ट्रीट डॉग्स की संख्या लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है। इसी संख्या को सही और वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित करने के लिए एमसीडी का पशु चिकित्सा विभाग अब सभी स्ट्रीट डॉग्स को सीधे माइक्रोचिप लगाने की नई योजना पर काम कर रहा है।
सेंटर पर नसबंदी के दौरान ही लगाई जाएगी आधुनिक माइक्रोचिप
वर्तमान में पशु चिकित्सा विभाग के तहत कुल 13 निजी संस्थाएं मिलकर दिल्ली भर में 20 स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन सेंटर का सफल संचालन कर रही हैं। इस योजना के तहत जिस भी स्ट्रीट डॉग को नसबंदी प्रक्रिया के लिए सेंटर लाया जाएगा, उसी इलाज के दौरान ही उसे यह माइक्रोचिप लगा दी जाएगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि स्ट्रीट डॉग्स के कान पर एक विशेष आईएसओ-प्रमाणित (ISO-Certified) माइक्रोचिप लगाई जाएगी। व्यस्त सड़कों पर सीधे चिप लगाना संभव नहीं है, इसलिए इन्हें पकड़कर कैटल पॉइंट पर लाया जाता है। फिलहाल दिल्ली में मालवीय नगर, तिमारपुर और नजफगढ़ के तीन सेंटरों पर टैग लगाए जा रहे हैं।
माइक्रोचिप की यूनीक आईडी में दर्ज होगी पशुओं की पूरी डिटेल
इस आधुनिक माइक्रोचिप के अंदर प्रत्येक स्ट्रीट डॉग की एक बेहद विशिष्ट पहचान सुरक्षित रहेगी। इस डिजिटल चिप में कुत्ते की अनुमानित आयु, उसका रंग, शारीरिक पहचान और वह किस वार्ड या इलाके से पकड़ा गया है, इसकी पूरी सटीक जानकारी हमेशा के लिए दर्ज की जाएगी।
इसके अलावा जानवर की नसबंदी की वर्तमान स्थिति, रेबीज वैक्सीनेशन की तारीख, अगला टीका कब लगाया जाना है और संबंधित एनजीओ का नाम भी इसमें स्टोर रहेगा। इस तकनीक से आवारा पशुओं की निगरानी करना और उनकी बढ़ती आबादी पर लगाम लगाना प्रशासन के लिए काफी आसान हो जाएगा।

