West Bengal News: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ शुक्रवार को सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पिछले साल आयोजित शहीद दिवस रैली के दौरान सड़कों को अवरुद्ध करने से जुड़े अवमानना मामले में दोनों बड़े नेताओं को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी और न्यायमूर्ति अपूर्व सिन्हा रे की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील श्रीकांत दत्ता ने यह संवेदनशील मामला उठाया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि तृणमूल कांग्रेस ने साल 2018 में आए उच्च न्यायालय के एक महत्वपूर्ण निर्देश का सरेआम और गंभीर उल्लंघन किया है।
अदालत के पुराने आदेश की अवमानना का आरोप
हाई कोर्ट ने साल 2018 में आदेश दिया था कि किसी भी बड़े राजनीतिक आयोजन के दौरान शहर की मुख्य सड़कें पूरी तरह बंद नहीं होनी चाहिए। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य की पीठ ने साफ कहा था कि पैदल चलने वालों और आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता खुला रखना बेहद जरूरी है।
अवमानना याचिका दायर करने वाले वकील दत्ता ने दावा किया कि 21 जुलाई 2025 को आयोजित टीएमसी की शहीद दिवस रैली के दौरान अदालती आदेशों की धज्जियां उड़ाई गईं। रैली की भारी भीड़ के कारण कोलकाता का पूरा एस्प्लेनेड इलाका और वहां की मुख्य सड़कें कई घंटों तक पूरी तरह से जाम रहीं।
ममता और अभिषेक को देना होगा जवाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी को आधिकारिक नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए अगली सुनवाई के लिए 3 जुलाई की तारीख तय कर दी है।
तृणमूल कांग्रेस हर साल 21 जुलाई 1993 की पुलिस गोलीबारी की घटना की याद में ‘शहीद दिवस’ मनाती है। तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के दौरान ममता बनर्जी के नेतृत्व में निकाली गई एक रैली पर पुलिस ने गोलियां चलाई थीं, जिसमें युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी।
हर साल धर्मतला में जुटती है भारी भीड़
ममता बनर्जी ने नब्बे के दशक के अंत में कांग्रेस से अलग होकर अपनी नई पार्टी तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था। तब से उनकी पार्टी हर साल 21 जुलाई को कोलकाता के धर्मतला इलाके में एक विशाल रैली का आयोजन करती है, जिसमें लाखों की संख्या में समर्थक जुटते हैं।
इस सालाना रैली के कारण कोलकाता की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अब हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद राज्य की राजनीति गर्मा गई है और टीएमसी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
Author: Sourav Banerjee

