Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पांवटा साहिब नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में हो रही देरी पर कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाने के आरोपों पर प्रदेश सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए सख्त आदेश दिए हैं। अदालत ने साफ कहा कि इस स्टेटस रिपोर्ट में एसडीएम और राज्य चुनाव आयोग स्पष्ट करें कि उन्होंने अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन किस प्रकार और क्यों नहीं किया।
अधिसूचना जारी होने के बाद भी नहीं बुलाई गई पहली बैठक
यह मामला कोर्ट के समक्ष ६ जुलाई को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। याचिकाकर्ता कुलदीप चौधरी और अन्य नवनिर्वाचित पार्षदों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। नगर परिषद के लिए बीते १७ मई को वोटिंग हुई थी और उसी शाम चुनाव परिणाम भी घोषित कर दिए गए थे।
इसके बाद २३ मई को राज्य चुनाव आयोग ने म्युनिसिपल एक्ट की जरूरी धाराओं के तहत आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। इस सरकारी अधिसूचना में सभी जीते हुए सदस्यों के नामों की घोषणा की गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इसके बाद पहली बैठक बुलाने में कोई कानूनी अड़चन नहीं थी।
उपायुक्त के स्पष्ट आदेश के बावजूद एसडीएम ने टाली तारीखें
पार्षदों की मुख्य शिकायत है कि सभी आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी स्थानीय प्रशासन सुस्त बैठा रहा। पांवटा साहिब के एसडीएम ने अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का निर्वहन समय पर नहीं किया। सरकार ने भी २७ मई को प्रधान सचिव के माध्यम से सभी उपायुक्तों को बैठक के निर्देश दिए थे।
इसी आदेश के तहत सिरमौर के उपायुक्त ने २९ मई को एसडीएम को पहली बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया था। पीठासीन अधिकारी ने २ जून और ९ जून को तारीखें तय कीं, लेकिन बाद में शुद्धिपत्र जारी कर बैठक को अगले आदेश तक बिना किसी ठोस कारण के स्थगित कर दिया।

