Women Commission Strict Action: राज्य महिला आयोग सख्त, दो नोटिस के बाद भी गैरहाजिर रहने पर घर से उठाएगी पुलिस

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Himachal News: राज्य महिला आयोग ने अपनी महत्वपूर्ण सुनवाइयों में लगातार गैरहाजिर रहने वाले दोषी पक्षों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपना लिया है। आयोग ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि दो बार लीगल नोटिस जारी होने के बावजूद यदि कोई पक्ष सुनवाई में उपस्थित नहीं होता है, तो पुलिस उसे घर से पकड़कर आयोग के सामने पेश करेगी।

मंगलवार को महिला आयोग की कोर्ट में विभिन्न गंभीर शिकायतों से जुड़े कुल 40 मामलों की सुनवाई तय की गई थी। इनमें से केवल 22 मामलों पर ही पूरी सुनवाई संभव हो सकी। बाकी बचे अधिकांश मामलों में एक या दोनों पक्षों के समय पर उपस्थित न होने के कारण केस की कार्यवाही को आगे बढ़ाना पड़ा है।

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वर्षों से पेंडिंग पड़े हैं महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़े मामले

आयोग ने अनुपस्थित रहने वाले सभी डिफाल्टर पक्षों को नई तारीख देते हुए इसे हाजिर होने का आखिरी मौका माना है। महिला आयोग के सामने कई पारिवारिक और उत्पीड़न से जुड़े मामले पिछले कई वर्षों से पेंडिंग चल रहे हैं। इनमें से कुछ मुख्य शिकायतें तो पिछले पांच से छह सालों से अंतिम फैसले का इंतजार कर रही हैं।

विभाग द्वारा बार-बार समन भेजने के बाद भी प्रतिवादी पक्ष कोर्ट नहीं पहुंच रहे हैं। इस वजह से पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने में बहुत ज्यादा देरी हो रही है। आयोग की अध्यक्ष ने साफ कहा कि पीड़ित महिलाओं को समय पर न्याय दिलाना हमारी पहली प्राथमिकता है और अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बिना एफआईआर और औपचारिकता के प्रक्रिया बनाने पर रोक

कई संवेदनशील शिकायतों में जवाब दाखिल करने के लिए बुलाए गए दूसरे पक्ष के लोग जानबूझकर सुनवाई में नहीं आ रहे हैं। इससे शिकायतों का त्वरित निस्तारण प्रभावित हो रहा है। आयोग ने इसे कानूनी प्रक्रिया में बाधा मानते हुए संबंधित जिला पुलिस कप्तानों को विशेष सहायता प्रदान करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

इस बीच आयोग के सामने कुछ ऐसे हैरान करने वाले मामले भी आए, जहां बिना किसी औपचारिक या लिखित शिकायत दर्ज किए ही सीधे ससुराल पक्ष को बुला लिया गया था। आयोग के अनुसार बिना कोई कानूनी केस डायरी मेंटेन किए दोनों पक्षों में समझौते का प्रयास किया जा रहा था, जिससे पूरी प्रक्रिया काफी पेचीदा और संदिग्ध बन गई।

प्रशासन ने इस खामी को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिया है कि भविष्य में बिना पूरी कागजी कार्रवाई और तय नियमों के कोई भी कदम न उठाया जाए। अब बकायदा विधिवत रूप से रिकॉर्ड में शिकायत दर्ज होने के बाद ही दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर काउंसिलिंग की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

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