Himachal News: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने राज्य के फार्मा उद्योग को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश के दवा उत्पादन में हिमाचल की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। यह महत्वपूर्ण सेक्टर लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दे रहा है।
शांता कुमार ने बुधवार को जारी एक विशेष बयान में कहा कि इस बड़े उद्योग के विस्तार की काफी उम्मीदें हैं। इसके बावजूद राज्य में निर्मित दवाओं के सैंपल लगातार फेल हो रहे हैं। वरिष्ठ नेता ने इस पूरी स्थिति को जनता के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
पांच महीने में फेल हुए 264 दवाओं के सैंपल
पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि किसी भी वस्तु में मिलावट करना कानूनी अपराध है। हालांकि, बीमार मरीजों के इलाज में उपयोग होने वाली जीवनरक्षक दवाओं की गुणवत्ता में कमी करना सबसे बड़ा पाप है। उन्होंने राज्य सरकार से इस पूरे मामले की गहन जांच कराने की पुरजोर मांग की है।
शांता कुमार ने बताया कि राज्य के ड्रग कंट्रोलर डॉ. मुनीश कपूर ने दोषी फार्मा कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच महीनों के भीतर ही हिमाचल प्रदेश की करीब 264 दवाओं के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में पूरी तरह फेल पाए गए हैं।
दोषी फार्मा कंपनियों पर पारदर्शी कार्रवाई करे प्रशासन
उन्होंने ड्रग कंट्रोलर से आग्रह किया कि पिछले साल जिन सैकड़ों दवाओं के सैंपल सब-स्टैंडर्ड मिले थे, उनकी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। प्रशासन बताए कि उन दोषी कंपनियों पर क्या कानूनी कार्रवाई हुई। ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी सामने न आना शासन-प्रशासन की पूरी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावी कानूनी कार्रवाई की कमी के कारण ही ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जा रही हैं। शांता कुमार ने कहा कि हिमाचल के गौरवशाली दवा उद्योग की ग्लोबल विश्वसनीयता बनाए रखने और जनहित की रक्षा के लिए प्रदेश सरकार को अब बेहद कड़े और पारदर्शी कदम उठाने ही होंगे।

