कालका-शिमला रेल मार्ग पर अब और सुरक्षित होगा सफर, रेल मोटर कार में हुआ यह बड़ा बदलाव

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Himachal Pradesh News: वर्ल्ड हेरिटेज साइट कालका-शिमला रेल मार्ग पर सैलानियों का सफर अब और अधिक सुहाना और सुरक्षित बनेगा। रेलवे प्रशासन ने 1927 में बनी ऐतिहासिक रेल मोटर कार के पुराने वैक्यूम ब्रेक सिस्टम को हटाकर आधुनिक एयर ब्रेक सिस्टम लगा दिया है। इसके सफल ट्रायल के बाद अब मंत्रालय से हरी झंडी का इंतजार है।

आधुनिक ब्रेक सिस्टम से बढ़ेगी यात्रियों की सुरक्षा

पुराना वैक्यूम ब्रेक सिस्टम आपातकालीन स्थितियों में उतना प्रभावी नहीं माना जाता था, जो रेलवे के लिए चिंता का विषय था। लंबी तकनीकी जांच और परीक्षण के बाद एयर ब्रेक सिस्टम को रेल मोटर कार में फिट किया गया है। यह नई प्रणाली इमरजेंसी में तुरंत रिस्पॉन्स देगी, जिससे यात्रियों की यात्रा पूरी तरह सुरक्षित होगी।

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ऐतिहासिक धरोहर और सफर की खास विशेषता

वर्ष 1903 में कालका-शिमला ट्रैक पर टॉय ट्रेन शुरू हुई, जो शुरुआत में स्टीम इंजन से चलती थी। बाद में 1927 में यात्रियों की सुविधा और समय की बचत के लिए रेल मोटर कार सेवा शुरू की गई। टॉय ट्रेन शिमला पहुंचने में 5.30 घंटे लेती है, जबकि रेल मोटर कार केवल 4 घंटे में यह दूरी तय करती है।

चुनौतियों के बीच रेल मोटर कार का आकर्षण

रेल मोटर कार में मात्र 12 यात्री बैठ सकते हैं और इसमें ड्राइवर के साथ यात्री एक ही केबिन में होते हैं। हालांकि, इन ऐतिहासिक कारों के पुर्जे अब आसानी से नहीं मिल रहे हैं, जिससे रेलवे के लिए इनका रखरखाव कठिन हो गया है। फिलहाल चार रेल मोटर कारों में से दो ही चलने लायक स्थिति में हैं।

Author: Sunita Gupta

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